भाटापारा की महिला शक्ति ने देखा सिद्धखोल का वैभव प्राकृतिक छटा के बीच मनाया गया सावन उत्सव अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति नारी प्रकोष्ठ द्वारा पर्यटन भ्रमण का आयोजन
भाटापारा। सावन मास को आध्यात्मिक शुद्धि, प्रकृति के उल्लास और देवाधिदेव महादेव की उपासना का पवित्र काल माना जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। चारों ओर फैली हरितिमा, कल-कल बहती जलधाराएं और सुहाना वातावरण मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आनंद का संचार करते हैं। इसी प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक भाव को आत्मसात करते हुए अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति नारी प्रकोष्ठ द्वारा सावन उत्सव को प्रकृति दर्शन से जोड़ते हुए विशेष पर्यटन भ्रमण का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर भाटापारा की महिला शक्ति ने सिद्धखोल जल प्रपात के प्राकृतिक वैभव का आनंद लिया और प्रकृति की मनोरम छटा के बीच सावन उत्सव मनाया। कार्यक्रम में लगभग 40 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
प्रकृति के उत्सव का अनूठा दर्शन
सावन मास धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से जितना पावन माना जाता है, उतना ही यह प्रकृति के सौंदर्य का भी उत्सव है। बारिश के बाद धरती का हर कोना हरियाली से भर उठता है और वातावरण में एक नई ताजगी दिखाई देती है। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति नारी प्रकोष्ठ ने इस वर्ष सावन उत्सव को पारंपरिक आयोजन से आगे बढ़ाकर प्रकृति दर्शन और पर्यटन भ्रमण के रूप में मनाया।
संस्था द्वारा समय-समय पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सकारात्मक संदेश दिया जाता रहा है। इसी कड़ी में सिद्धखोल जल प्रपात का भ्रमण महिलाओं के लिए मनोरंजन के साथ-साथ प्रकृति और अध्यात्म से जुड़ने का सुंदर अवसर बना।
सिद्धखोल जल प्रपात ने मोहा मन
भाटापारा से लगभग 65 किलोमीटर दूर, कसडोल के निकट स्थित सिद्धखोल जल प्रपात इन दिनों बारिश के मौसम में अपने प्राकृतिक सौंदर्य के चरम पर नजर आ रहा है। चारों ओर फैली हरियाली के बीच ऊंचाई से गिरती जलधारा दूधिया स्वरूप में दिखाई देती है। जलप्रपात की कल-कल ध्वनि और आसपास का सुरम्य वातावरण वहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति को सहज ही आकर्षित करता है।
प्राकृतिक सौंदर्य के साथ यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर इस स्थल को आध्यात्मिक महत्व भी प्रदान करता है। प्रकृति और अध्यात्म के इस अनूठे संगम का आनंद लेते हुए भाटापारा की महिला शक्ति ने पूरे उमंग और उल्लास के साथ सावन उत्सव मनाया।
झूले, मनोरंजन और भक्ति का संगम
अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति नारी प्रकोष्ठ के प्रांतीय उपाध्यक्ष उषा मिश्रा एवं भाटापारा इकाई अध्यक्ष शिवानी शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस पर्यटन सावन उत्सव में महिलाओं ने विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों में भाग लिया।
सिद्धखोल के सुरम्य वातावरण में महिलाओं ने सावन के पारंपरिक झूले का आनंद लिया। गीत-संगीत और मनोरंजक गतिविधियों के बीच महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं। कार्यक्रम के दौरान प्राचीन शिवलिंग का पूजन-अर्चन कर भगवान शिव का आशीर्वाद भी लिया गया। इस दौरान वातावरण भक्तिमय हो उठा।
सामूहिक भोज से बढ़ी आत्मीयता
सावन उत्सव के दौरान आयोजित सामूहिक भोज ने कार्यक्रम में आपसी प्रेम, सौहार्द और आत्मीयता की भावना को और मजबूत किया। सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर भोजन किया और अपने अनुभव साझा किए। प्राकृतिक वातावरण में साथ बिताए गए इन खुशनुमा पलों ने महिला सदस्यों के बीच आपसी जुड़ाव को और गहरा किया।
महिला शक्ति ने दिया सकारात्मक संदेश
सिद्धखोल जल प्रपात की प्राकृतिक सुंदरता के बीच आयोजित यह सावन उत्सव केवल मनोरंजन और पर्यटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रकृति संरक्षण, आध्यात्मिकता, सामाजिक एकता और महिला सहभागिता का सकारात्मक संदेश भी दिया।
महिलाओं ने कहा कि भागदौड़ भरी दिनचर्या के बीच प्रकृति के करीब कुछ समय बिताना मन और शरीर दोनों को नई ऊर्जा प्रदान करता है। सावन के इस पवित्र अवसर पर सिद्धखोल जैसे प्राकृतिक स्थल का भ्रमण उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा।
अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति नारी प्रकोष्ठ का यह आयोजन प्रकृति के प्रति प्रेम, आध्यात्मिक आस्था और महिला शक्ति के उत्साह का सुंदर संगम बनकर सामने आया। सिद्धखोल की हरियाली, जलप्रपात की कल-कल ध्वनि, भगवान शिव की आराधना और महिलाओं की उमंग ने सावन उत्सव को यादगार बना दिया।

