परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं, गड़बड़ी पर होगी कठोर कार्रवाई : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आईजीकेवी की परीक्षा में प्रश्नपत्र प्रसारित होने के मामले को मुख्यमंत्री ने लिया गंभीरता से पांच सदस्यीय जांच समिति गठित, पुलिस में एफआईआर दर्ज प्रश्नपत्र कहां से और कैसे हुआ प्रसारित, जांच में सामने आएगा पूरा सच दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा : मुख्यमंत्री

 रायपुर, 21 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने अथवा विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।





मुख्यमंत्री के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। वहीं, प्रकरण में तेलीबांधा थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की तकनीकी जांच में साइबर सेल की भी मदद ली जा रही है, ताकि प्रश्नपत्र के प्रसारण से जुड़ी पूरी कड़ी का पता लगाया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। भर्ती परीक्षाओं से लेकर शैक्षणिक परीक्षाओं तक हर परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। विद्यार्थियों की मेहनत, उनका विश्वास और उनका भविष्य सर्वोपरि है। प्रश्नपत्र कहां से बाहर आया, किसने इसे प्रसारित किया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही, जांच में प्रत्येक तथ्य सामने लाया जाएगा। दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की गई थी। प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होने वाले थे। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने की शिकायत सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है। निरस्त परीक्षा सितंबर के प्रथम सप्ताह में पुनः आयोजित की जाएगी।

गठित जांच समिति सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र और परीक्षा में उपयोग किए जाने वाले मूल प्रश्नपत्र का मिलान करेगी। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया, किन माध्यमों से आगे प्रसारित हुआ और इसकी पहुंच कहां तक रही। पुलिस और साइबर सेल उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों तथा अन्य तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएंगे।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने तथा मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखना सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसी किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिससे मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के हित प्रभावित हों।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके सुरक्षित रख-रखाव, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।