फरसपाल हाई स्कूल में पालकों और शिक्षकों से रूबरू हुए जनपद सदस्य पवन कुमार कर्मा, बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

 दंतेवाड़ा, 22 अगस्त 2026। ग्राम पंचायत फरसपाल स्थित हाई स्कूल में आज बच्चों की शिक्षा, पढ़ाई की गुणवत्ता और उनके उज्ज्वल भविष्य को लेकर पालकों एवं शिक्षकों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान जनपद सदस्य गीदम क्षेत्र क्रमांक 11 एवं अनुसूचित जनजाति मोर्चा जिला मंत्री, जिला दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ पवन कुमार कर्मा ने स्कूल पहुंचकर पालकों एवं शिक्षकों से रूबरू होकर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य की तैयारी को लेकर विस्तार से संवाद किया।










चर्चा के दौरान पवन कुमार कर्मा ने कहा कि बच्चों का भविष्य केवल स्कूल की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि घर और स्कूल दोनों जगह मिलकर बच्चों के शैक्षणिक विकास पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी रुचि, क्षमता और भविष्य के लक्ष्य को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी बेहतर अवसरों के लिए तैयार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। बच्चों को केवल परीक्षा पास करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए तैयार किया जाना चाहिए।

घर पर भी बच्चों की पढ़ाई पर दें विशेष ध्यान

पालकों से संवाद करते हुए पवन कुमार कर्मा ने विशेष रूप से कहा कि जब बच्चे स्कूल से घर लौटते हैं, तो पालक उनकी पढ़ाई के लिए घर में भी उचित वातावरण तैयार करें। उन्होंने पालकों से बच्चों को कम से कम दो घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के लिए डांटने के बजाय उन्हें समझाकर और प्रोत्साहित करके पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए। पालक प्रतिदिन बच्चों से स्कूल में हुई पढ़ाई के बारे में जानकारी लें और यह जानने का प्रयास करें कि उन्हें किस विषय में कठिनाई हो रही है। यदि बच्चा किसी विषय में कमजोर है, तो शिक्षक से संपर्क कर उसकी समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जाना चाहिए।

शिक्षक और पालक मिलकर बनाएं बच्चों का भविष्य

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बच्चों की सफलता के लिए शिक्षक और पालक के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। स्कूल में शिक्षक बच्चों को शिक्षा प्रदान करते हैं, जबकि घर में पालक उनकी पढ़ाई और अनुशासन पर नजर रखते हैं। दोनों के सामूहिक प्रयास से ही बच्चों को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

पवन कुमार कर्मा ने शिक्षकों से कहा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता अलग होती है। इसलिए बच्चों की व्यक्तिगत रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ बच्चों में संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।

उन्होंने पालकों से अपील करते हुए कहा कि वे बच्चों को मोबाइल फोन और अन्य अनावश्यक गतिविधियों में अधिक समय बिताने से रोकें तथा उनके लिए पढ़ाई का नियमित समय निर्धारित करें। साथ ही बच्चों को खेलकूद, सामान्य ज्ञान, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

ग्रामीण बच्चों को भी मिले आगे बढ़ने का पूरा अवसर

पवन कुमार कर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही मार्गदर्शन, बेहतर वातावरण और निरंतर प्रोत्साहन देने की है। यदि शिक्षक, पालक और समाज मिलकर बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दें तो गांव के बच्चे भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा को लेकर समय-समय पर पालकों और शिक्षकों के बीच ऐसी चर्चा होती रहनी चाहिए, ताकि बच्चों की प्रगति का आकलन किया जा सके और उनकी कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।

इस दौरान स्कूल के शिक्षकों एवं पालकों ने भी बच्चों की पढ़ाई से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। सभी ने बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में मिलकर कार्य करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में पवन कुमार कर्मा ने कहा कि आज के बच्चे ही आने वाले कल के समाज और क्षेत्र की तस्वीर बदलेंगे। इसलिए उनकी शिक्षा और बेहतर भविष्य के निर्माण को हम सभी को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने पालकों, शिक्षकों और समाज के सभी लोगों से बच्चों की पढ़ाई के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।