रामचरित स्मरण के साथ धर्म-संस्कृति का प्रसार, रामायण ज्ञान परीक्षा में दिखा उत्साह बरसते पानी के बीच परीक्षा केंद्र पहुंचे परीक्षार्थी, सात वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही रामायण ज्ञान परीक्षा स्थानीय नगर पालिका विद्यालय में हुआ आयोजन, करीब 130 परीक्षार्थियों ने कराया था पंजीयन
धर्म, संस्कृति और संस्कारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरयू साहित्य परिषद द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही रामायण ज्ञान परीक्षा इस वर्ष भी उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। लगातार सात वर्षों से आयोजित हो रही इस परीक्षा में इस बार भी परीक्षार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र पहुंचे और आयोजन के प्रति अपनी आस्था एवं जुड़ाव का परिचय दिया।
स्थानीय नगर पालिका विद्यालय में आयोजित यह परीक्षा किसी विद्यालय या महाविद्यालय की नियमित परीक्षा नहीं थी और न ही इसका संबंध किसी कैरियर या प्रतियोगी परीक्षा से था। इसके बावजूद परीक्षार्थियों में इसे लेकर विशेष उत्साह और कौतूहल देखने को मिला। करीब एक माह पूर्व से परीक्षा के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू की गई थी। पंजीयन के दौरान ही परीक्षार्थियों में रामायण और रामचरितमानस से जुड़े प्रश्नों को लेकर जिज्ञासा दिखाई देने लगी थी।
इस वर्ष लगभग 130 परीक्षार्थियों ने पंजीयन कराया, जिनमें बड़ी संख्या में परीक्षार्थी निर्धारित समय पर बरसते पानी के बीच परीक्षा स्थल पहुंचे। बारिश भी उनके उत्साह को कम नहीं कर सकी। परीक्षा केंद्र पर पहुंचे परीक्षार्थियों के उत्साह ने यह स्पष्ट कर दिया कि रामचरितमानस और भारतीय संस्कृति से जुड़ा यह आयोजन अब लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुका है।
पूजन-अर्चन के साथ हुआ शुभारंभ
समस्त ब्राह्मण प्रकल्पों के संयुक्त संयोजन में आयोजित रामायण ज्ञान परीक्षा का शुभारंभ विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, श्रीरामचरितमानस और गोस्वामी तुलसीदास जी के पूजन से की गई।
परीक्षार्थियों का उत्साहवर्धन करने और उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए उपस्थित अतिथियों ने पं. दीपक पाण्डेय के सानिध्य में पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर व्याख्यान दिवाकर आचार्य झम्मन शास्त्री, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा एवं पूर्व कृषि उपज मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आयोजन के मार्गदर्शक सत्यनारायण जोशी, नरेश चौबे, सरयू साहित्य परिषद के पदाधिकारी एवं सदस्यगण, विभिन्न ब्राह्मण प्रकल्पों के प्रमुख, मातृशक्तियां तथा बड़ी संख्या में परीक्षार्थी उपस्थित रहे।
रामायण जीवन मूल्यों और संस्कारों की अमूल्य धरोहर
परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए अतिथियों ने रामायण ज्ञान परीक्षा के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार, मर्यादा और जीवन मूल्यों का मार्गदर्शन करने वाली अमूल्य धरोहर है।
रामायण के माध्यम से समाज को सत्य, त्याग, कर्तव्य, सेवा, संयम, भाईचारे और मर्यादा जैसे मूल्यों की प्रेरणा मिलती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
अतिथियों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति एवं साहित्य से जोड़ने के लिए इस तरह के रचनात्मक आयोजनों की आवश्यकता है। रामायण ज्ञान परीक्षा इसी दिशा में एक सकारात्मक और सराहनीय पहल है।
सात वर्षों से जारी है ज्ञान और संस्कृति का अभियान
सरयू साहित्य परिषद द्वारा पिछले सात वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही रामायण ज्ञान परीक्षा अब केवल एक परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह रामचरितमानस के अध्ययन, धर्म-संस्कृति के संरक्षण और संस्कारों के प्रसार का अभियान बन चुकी है।
हर वर्ष इस परीक्षा के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि यह दर्शाती है कि आधुनिक समय में भी समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना चाहता है। इस वर्ष बारिश के बीच परीक्षा स्थल पहुंचे परीक्षार्थियों की मौजूदगी ने भी आयोजन की लोकप्रियता और उसके प्रति लोगों की प्रतिबद्धता को प्रमाणित किया।
रामचरित स्मरण, ज्ञान की जिज्ञासा और संस्कृति के प्रति सम्मान के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संस्कार और संस्कृति से जुड़ी परंपराएं जब निरंतरता के साथ आगे बढ़ती हैं, तो वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन जाती हैं।



