महिला साक्षरता की अलख जगाकर आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त कर रहीं व्याख्याता शांति सोनी

 बिलासपुर। "जब एक महिला शिक्षित होती है, तो केवल उसका जीवन नहीं बदलता, बल्कि पूरा परिवार और समाज प्रगति की ओर अग्रसर होता है।" इसी सोच को साकार रूप देते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद की व्याख्याता शांति सोनी महिला सशक्तिकरण और साक्षरता के क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य कर रही हैं।










विद्यालयीन समय के बाद शांति सोनी अपने विद्यार्थियों के साथ गांव-गांव और घर-घर पहुँचकर अशिक्षित महिलाओं का सर्वेक्षण करती हैं। वे उन्हें शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए नियमित रूप से पढ़ना-लिखना सिखाती हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हो रही है। उनके सतत प्रयासों से अनेक महिलाओं ने पहली बार अपना नाम लिखना, आवश्यक दस्तावेज़ पढ़ना, आवेदन भरना तथा दैनिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को समझना सीखा है। शिक्षा ने इन महिलाओं के जीवन में नई आशा, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का संचार किया है।

शांति सोनी ने अपने प्रयासों को केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विभाग द्वारा 22 मार्च को आयोजित साक्षरता महापरीक्षा अभियान में भी इन महिलाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की। परीक्षा में शामिल होकर महिलाओं ने उल्लेखनीय उत्साह और आत्मविश्वास का परिचय दिया। परीक्षा के बाद उनके चेहरों पर झलकती सफलता की मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि शिक्षा ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई शुरुआत कर दी है।

ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा, समानता और महिला सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने वाला यह अभियान सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बन गया है। शांति सोनी का यह नवाचार महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने के साथ-साथ समाज में शिक्षा की अलख जगाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। उनका यह प्रयास "विकसित भारत" के निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को भी सशक्त रूप से रेखांकित करता है।

स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों एवं जनप्रतिनिधियों ने शांति सोनी के इस समर्पित एवं अनुकरणीय कार्य की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता का प्रेरणादायी मॉडल बताया है।