बिलासपुर। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद, विकासखंड बिल्हा, जिला बिलासपुर की नवाचारी व्याख्याता शांति सोनी का निरंतर प्रयास रहा है कि शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचकर सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बने। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने ग्राम पंचायत महमंद में महिला सशक्तिकरण, प्रौढ़ साक्षरता एवं सामुदायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचारी और जनहितकारी पहल की हैं।
व्याख्याता शांति सोनी ने विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा निर्धारित 10 बोनस अंकों का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों को समाजोपयोगी गतिविधियों से जोड़ते हुए अवकाश के दिनों तथा विद्यालय समय के बाद अतिरिक्त समय में घर-घर जाकर महिलाओं एवं किशोरियों को साक्षरता अभियान से जोड़ने का दायित्व सौंपा गया। इस पहल के माध्यम से शिक्षा का प्रकाश प्रत्येक घर तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास किया गया।
उनके मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत महमंद की महिलाओं एवं किशोरियों ने उत्साहपूर्वक साक्षरता अभियान में भाग लिया। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि 22 मार्च को आयोजित साक्षरता महापरीक्षा में लगभग 80 महिलाओं ने परीक्षा देकर शिक्षा के प्रति अपनी जागरूकता और उत्साह का परिचय दिया। ग्रामीण क्षेत्र में यह उपलब्धि महिला शिक्षा और जनभागीदारी का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी।
व्याख्याता शांति सोनी का मानना है कि जब महिलाएँ शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है। उनका यह जनसेवी प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप विद्यालय और समुदाय के बीच सशक्त सहभागिता स्थापित करते हुए शिक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।
शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह समन्वित अभियान आज ग्रामीण समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई मिसाल बनकर उभर रहा है तथा महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास की दिशा में प्रेरणादायी भूमिका निभा रहा है।







