प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों पर सरकार से मांगा जवाब, लोक सिरजनहार यूनियन ने श्रम विभाग में दायर की आरटीआई
रायपुर। लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) ने छत्तीसगढ़ के लाखों प्रवासी श्रमिकों एवं उनके परिवारों से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से श्रम विभाग में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत विस्तृत आवेदन प्रस्तुत किया है। यूनियन का कहना है कि रोजगार की तलाश में हर वर्ष बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के श्रमिक अन्य राज्यों में पलायन करते हैं, लेकिन उनके साथ होने वाली दुर्घटनाओं, मौतों, शोषण, मानव तस्करी, हिंसा और अन्य गंभीर घटनाओं के संबंध में सरकारी आंकड़े एवं राहत व्यवस्था स्पष्ट नहीं है।
आरटीआई आवेदन श्रम आयुक्त कार्यालय, श्रम विभाग छत्तीसगढ़ शासन को संबोधित करते हुए प्रवासी श्रमिकों एवं उनके आश्रित परिवारों से संबंधित वर्षवार जानकारी मांगी गई है।
यूनियन द्वारा प्रमुख रूप से निम्नलिखित जानकारियां मांगी गई हैं—
प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु, दुर्घटना, गंभीर चोट, विकलांगता, लापता होने, हिंसा, बंधक बनाए जाने, मानव तस्करी एवं श्रम शोषण से जुड़े मामलों का वर्षवार एवं राज्यवार विवरण।
प्रत्येक घटना का स्थान, तिथि, प्रभावित व्यक्तियों की संख्या एवं घटना की प्रकृति।
अन्य राज्यों में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों के आश्रित बच्चों की दुर्घटना अथवा मृत्यु से संबंधित उपलब्ध जानकारी।
प्रवासी श्रमिकों की पत्नियों, बच्चों एवं अन्य आश्रितों के साथ हुई दुर्घटनाओं या गंभीर संकट की घटनाओं का विवरण।
इन सभी मामलों में श्रम विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी।
मृतकों एवं प्रभावित परिवारों को प्रदान किए गए मुआवजे, आर्थिक सहायता, पुनर्वास एवं अन्य राहत का मामलेवार विवरण।
जिन मामलों में सहायता या मुआवजा नहीं मिला, उसके कारण।
अन्य राज्यों की सरकारों, जिला प्रशासन, पुलिस अथवा संबंधित संस्थाओं के साथ हुए पत्राचार एवं समन्वय की जानकारी।
प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पुनर्वास एवं राहत से संबंधित शासनादेश, परिपत्र, दिशा-निर्देश, मानक कार्यप्रणाली (SOP) एवं योजनाओं की प्रतियां।
यदि विभाग ऐसे मामलों का पृथक अभिलेख नहीं रखता है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी।
विषय से संबंधित प्राप्त शिकायतों, आपत्तियों, सुझावों एवं अभ्यावेदनों की प्रमाणित प्रतियां।
यदि इस विषय पर कोई मूल्यांकन, प्रभाव अध्ययन या समीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई हो, तो उसकी प्रमाणित प्रति।
यूनियन ने यह भी अनुरोध किया है कि यदि आवेदन में मांगी गई किसी सूचना का संबंध किसी अन्य लोक प्राधिकारी से हो, तो सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(3) के तहत संबंधित विभाग को आवेदन स्थानांतरित कर इसकी सूचना आवेदक को उपलब्ध कराई जाए।
लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) का कहना है कि छत्तीसगढ़ के लाखों श्रमिक रोज़गार के लिए अन्य राज्यों में जाते हैं। समय-समय पर उनके साथ दुर्घटनाओं, मौत, शोषण, मानव तस्करी तथा अमानवीय व्यवहार की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन इन मामलों में सरकारी रिकॉर्ड, राहत, मुआवजा और जवाबदेही की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक नहीं है।
यूनियन का मानना है कि यह आरटीआई किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि व्यापक जनहित में लगाई गई है, ताकि तथ्यात्मक जानकारी सामने आए और उसके आधार पर प्रवासी श्रमिकों एवं उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रभावी नीतिगत पहल सुनिश्चित की जा सके।
