पद का दुरुपयोग कर बेटियों के गुनहगारों के पक्ष में खड़े राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को तत्काल बर्खास्त करे सरकार : संगीता सिन्हा
रायपुर, 27 जुलाई 2026।
प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जंतर-मंतर में देश की बेटियों के साथ हुई कथित अमानवीय घटनाओं को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट और पीड़ित छात्राओं के समर्थन में की गई टिप्पणियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देना महिला विरोधी और संवैधानिक दायित्वों के विपरीत कदम है।
उन्होंने कहा कि महिला आयोग का दायित्व महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय, अत्याचार और उत्पीड़न के मामलों में संज्ञान लेकर पीड़ितों को न्याय दिलाना है, लेकिन वर्तमान में आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से भटककर सत्ता पक्ष के हितों की रक्षा करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
संगीता सिन्हा ने कहा कि जो लोग बेटियों के साथ हुई घटनाओं के विरोध में आवाज उठा रहे हैं, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ितों की आवाज दबाना और दोषियों के पक्ष में खड़ा होना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष से नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा देने तथा सरकार से उन्हें पद से हटाने की मांग की।
प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि हाल ही में जगदलपुर की रहने वाली 20 वर्षीय नीट छात्रा सुरला हारिका राव नायडू की आत्महत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी व्यवस्था से निराश होकर छात्रा ने यह कदम उठाया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर जा रही छत्तीसगढ़ की एक अन्य छात्रा की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई, लेकिन इन मामलों में राज्य महिला आयोग की ओर से कोई सक्रिय पहल दिखाई नहीं दी।
संगीता सिन्हा ने आरोप लगाया कि राज्य महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय राजनीतिक दृष्टिकोण से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं और बच्चियों के साथ हिंसा एवं उत्पीड़न से जुड़े अनेक वीडियो और तस्वीरें मौजूद हैं, लेकिन आयोग उन मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के बजाय विरोध की आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई की बात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि देशभर में विभिन्न छात्र आंदोलनों में बड़ी संख्या में छात्राएं शामिल हुईं। ऐसे आंदोलनों के दौरान महिलाओं के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार, पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार संबंधी आरोपों पर भी राज्य महिला आयोग को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए निष्पक्ष रूप से संज्ञान लेना चाहिए।
संगीता सिन्हा ने कहा कि महिला आयोग का गठन महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है। आयोग को किसी भी राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष और संवेदनशील भूमिका निभानी चाहिए, ताकि प्रदेश की महिलाओं का उस पर विश्वास कायम रह सके।
