‘एक पेड़ पुरखों के नाम’ अभियान में महिलाओं का उत्साह चरम पर मुक्तिधाम पहुंचकर परिवार सहित अपने पूर्वजों की स्मृति में कर रहीं पौधारोपण
रायपुर। मानव सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी संस्था कृष्ण मित्र फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘एक पेड़ पुरखों के नाम’ वृक्षारोपण अभियान को समाज का भरपूर सहयोग मिल रहा है। विगत दो सप्ताह से चल रहे इस अभियान में विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। महिलाएं अपने परिवार सहित सरजू बांधा मुक्तिधाम, टिकरापारा पहुंचकर अपने पूर्वजों की पावन स्मृति में पौधारोपण कर रही हैं।
संस्था के अध्यक्ष माधव लाल यादव ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों को अपने पुरखों की स्मृतियों से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। बड़ी संख्या में लोग स्वयं पौधे लेकर पहुंच रहे हैं तथा पूरे उत्साह के साथ पौधारोपण कर रहे हैं। अभियान में सहभागी नागरिक स्वयं गड्ढे खोदने, खाद एवं पानी की व्यवस्था करने सहित अन्य कार्यों में भी सहयोग दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस अभियान की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि महिलाएं बिना किसी संकोच के अपने पति, सास-ससुर एवं परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मुक्तिधाम पहुंचकर पौधारोपण कर रही हैं। यह अभियान सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दे रहा है।
पौधारोपण में शामिल प्रमुख नागरिक
मनहरण लाल सेन, जोहतरीन सेन, एकनाथ सेन, शशि सेन एवं किरण कुमार सेन ने नीम एवं पाम के पौधों का रोपण किया।
संतोष साहू ने अपने माता-पिता स्वर्गीय रामकिसन साहू एवं स्वर्गीय रंभा बाई साहू की पुण्य स्मृति में महुआ एवं पाम के पौधे लगाए।
माधव लाल यादव, संगीता यादव एवं वीणा यादव ने स्वर्गीय बंसी लाल यादव एवं स्वर्गीय शांति देवी यादव की स्मृति में पाम एवं कदम के पौधों का रोपण किया।
मीना यादव, राजू यादव एवं राजवीर यादव ने स्वर्गीय महेंद्र यादव की स्मृति में पारिजात का पौधा लगाया।
हेमलता संजय चंद्राकर ने अपने ससुर स्वर्गीय भरत चंद्राकर की स्मृति में पारिजात का पौधा रोपित किया।
अरुण सोनी एवं अज्जू पटौदी ने नीम एवं कदम के पौधे लगाए।
रेखा झंवर एवं खुशी झंवर ने अपने स्वर्गीय दादा-दादी नारायण दास झंवर एवं स्वर्गीय सुशीला झंवर की पुण्य स्मृति में पौधारोपण किया।
कृष्ण मित्र फाउंडेशन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पूर्वजों की स्मृति को सहेजने तथा पर्यावरण संरक्षण के इस पुनीत अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक पौधारोपण करें। प्रत्येक पौधा न केवल प्रकृति को हरियाली प्रदान करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने पुरखों की स्मृतियों का जीवंत प्रतीक भी बनेगा।




