बरसात के पानी ने खोली विकास कार्यों की पोल, पहली मूसलाधार बारिश में डूबा बिलासपुर

 बिलासपुर। मानसून की पहली लगातार मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर शहर में विकास कार्यों, स्मार्ट सिटी के दावों और नगर निगम की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी है। पिछले 24 घंटों से हो रही लगातार बारिश के कारण शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। मुख्य सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं, जिससे आमजन का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।











शहर के विभिन्न वार्डों और कॉलोनियों में जलभराव की गंभीर स्थिति देखने को मिली। कई स्थानों पर बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया, जिससे परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कॉलोनियों, गलियों और प्रमुख मार्गों पर घंटों तक पानी जमा रहा।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन और नगर निगम मानसून से पहले नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और सभी आवश्यक तैयारियां पूरी होने का दावा करते रहे, लेकिन पहली ही तेज बारिश ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी।

जनप्रतिनिधि लगातार विकास कार्यों का निरीक्षण और योजनाओं की बात करते रहे, लेकिन जमीनी हकीकत पहली बारिश में ही सामने आ गई। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर के कई हिस्सों में जलभराव ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही शहर की यह स्थिति है, तो आने वाले दिनों में और अधिक बारिश होने पर हालात कितने गंभीर हो सकते हैं? आम नागरिकों की चिंता बढ़ गई है और वे प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

हर साल दावे, हर साल नाकामी

नगर निगम हर वर्ष बारिश से पहले दावा करता है कि नालियों की व्यापक सफाई कर दी गई है, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष व्यवस्था की गई है और शहरवासियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। इस वर्ष भी ऐसे ही दावे किए गए थे, लेकिन पहली मूसलाधार बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की वास्तविकता सामने ला दी। जलभराव, बंद नालियां और बदहाल सड़कें यह बताने के लिए काफी हैं कि कागजों पर किए गए दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह सफल नहीं हो सके।