मानव सेवा की मिसाल: अंतिम यात्रा में भी सम्मान और सुकून का अहसास, कृष्ण मित्र फाउंडेशन की पहल बनी प्रेरणा

 बिलासपुर। किसी भी परिवार के लिए अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देना जीवन का सबसे भावुक और कठिन क्षण होता है। ऐसे समय में यदि श्मशान घाट में आने वाले लोगों को सम्मानपूर्वक बैठने की सुविधा, स्वच्छ वातावरण और आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध हों, तो दुख की उस घड़ी में भी उन्हें कुछ राहत और सुकून मिलता है।









इसी मानवीय सोच को साकार करने का सराहनीय कार्य कृष्ण मित्र फाउंडेशन द्वारा किया गया है। फाउंडेशन के माधव लाल यादव ने बताया कि जब वे श्मशान घाट में लोगों को बड़ी संख्या में ग्रेनाइट से बने मजबूत और आकर्षक बेंचों पर आराम से पालथी मारकर बैठते हुए देखते हैं और शांत मन से अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार की सभी धार्मिक रस्मों को निहारते हैं, तो उन्हें आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है। उनका कहना है कि सेवा का वास्तविक अर्थ वही है, जो किसी व्यक्ति के जीवन के सबसे कठिन समय में उसके काम आए।

उन्होंने कहा कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज के अनेक दानदाताओं, समाजसेवियों और सहयोगियों की सामूहिक भावना का परिणाम है। विशेष रूप से उन सभी ग्रेनाइट दानदाताओं और अन्य आवश्यक सामग्रियों का सहयोग देने वाले लोगों के प्रति उन्होंने हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके और समाजसेवी गोवर्धन झंवर के आग्रह पर बिना किसी संकोच के मुक्तहस्त से सहयोग प्रदान किया।

माधव लाल यादव ने कहा कि समाज में ऐसे अनेक लोग हैं जो सेवा करना चाहते हैं, उन्हें केवल सही उद्देश्य और विश्वास की आवश्यकता होती है। जब लोगों को यह भरोसा होता है कि उनका दिया गया सहयोग समाजहित में उपयोग होगा, तब वे बढ़-चढ़कर योगदान देते हैं। यही विश्वास इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बना।

उन्होंने बताया कि श्मशान घाट केवल अंतिम संस्कार का स्थान नहीं, बल्कि जीवन के सत्य का सबसे बड़ा संदेश देने वाला स्थल है। यहां आने वाला हर व्यक्ति दुख और संवेदनाओं से भरा होता है। ऐसे में बैठने की बेहतर व्यवस्था, स्वच्छ परिसर और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। ग्रेनाइट के मजबूत बेंचों की स्थापना से अब बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज़ से आने वाले लोगों को काफी राहत मिल रही है। पहले जहां लोगों को लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता था या असुविधाजनक स्थानों पर बैठना पड़ता था, वहीं अब वे सम्मानपूर्वक बैठकर अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति केवल बड़े-बड़े भवनों और विकास परियोजनाओं से नहीं होती, बल्कि ऐसी संवेदनशील पहलों से होती है जो मानवता को मजबूत बनाती हैं। अंतिम संस्कार स्थल पर उपलब्ध कराई गई यह सुविधा आने वाली कई पीढ़ियों तक लोगों के काम आएगी और सेवा का यह कार्य समाज में प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

कृष्ण मित्र फाउंडेशन ने इस अवसर पर सभी सहयोगी दानदाताओं, समाजसेवियों, शुभचिंतकों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी जनहित और मानव सेवा से जुड़े ऐसे कार्य निरंतर जारी रहेंगे। फाउंडेशन ने समाज के सक्षम लोगों से भी अपील की कि वे अपने सामर्थ्य के अनुसार सार्वजनिक हित के कार्यों में सहयोग करें, क्योंकि जरूरतमंदों की सहायता ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।

मानवता, सेवा और सामाजिक संवेदनशीलता का यह प्रयास आज उन सैकड़ों लोगों के लिए राहत का माध्यम बन चुका है, जो अपने जीवन के सबसे कठिन क्षणों में श्मशान घाट पहुँचते हैं। कृष्ण मित्र फाउंडेशन और उसके सहयोगियों की यह पहल न केवल सुविधाओं का विस्तार है, बल्कि समाज में करुणा, सहयोग और सेवा की भावना का जीवंत उदाहरण भी है।