कहानी शिक्षण विधि से कक्षा बनी आनंददायक, बाल-केंद्रित शिक्षण से साकार हो रही राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020
बिलासपुर। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद, विकासखंड बिल्हा, जिला बिलासपुर में व्याख्याता शांति सोनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप बाल-केंद्रित, अनुभवात्मक एवं सहभागितापूर्ण शिक्षण पद्धति को प्रभावी रूप से कक्षा में लागू कर रही हैं। वे कहानी शिक्षण विधि के माध्यम से कठिन एवं जटिल विषयों को भी सरल, सहज और रोचक बनाकर विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक एवं प्रभावशाली बना रही हैं।
शांति सोनी का मानना है कि जब पाठ्यवस्तु को प्रेरक कहानियों, जीवन से जुड़े प्रसंगों और स्थानीय उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया जाता है, तो विद्यार्थी केवल तथ्यों को याद नहीं करते, बल्कि विषय की अवधारणाओं को गहराई से समझते हैं। कक्षा में वे विद्यार्थियों से चिंतनपरक, विश्लेषणात्मक और जीवनोपयोगी प्रश्न पूछकर उनकी जिज्ञासा, तार्किक सोच, रचनात्मकता तथा अभिव्यक्ति क्षमता को निरंतर प्रोत्साहित करती हैं। इससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता निभाते हैं।
उनकी इस नवाचारी शिक्षण शैली से कक्षा का वातावरण भयमुक्त, संवादपरक और प्रेरणादायक बन गया है। विद्यार्थी समूह चर्चा, प्रश्नोत्तर, भूमिका-अभिनय, कहानी विश्लेषण तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं, जिससे सीखना उनके लिए एक आनंददायक और यादगार अनुभव बन जाता है।
विद्यालय परिवार का मानना है कि शांति सोनी की यह अभिनव शिक्षण पद्धति राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के मूल उद्देश्यों—रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर समझ विकसित करना, आलोचनात्मक एवं सृजनात्मक चिंतन को बढ़ावा देना, जीवन कौशल का विकास करना तथा प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा को निखारना—को प्रभावी रूप से साकार कर रही है। उनका यह प्रयास गुणवत्तापूर्ण, नवाचारी एवं संस्कारयुक्त शिक्षा की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभर रहा है।