17 जुलाई बना ऐतिहासिक दिन: श्री विजय वंदना हॉस्पिटल में दुर्लभ रीढ़ की बीमारी की जटिल सर्जरी सफल, मरीज को लकवे के खतरे से मिली नई जिंदगी

 बिलासपुर। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों के समन्वय से गंभीर एवं जटिल बीमारियों का सफल उपचार कर रहे श्री विजय वंदना हॉस्पिटल ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में अपनी उत्कृष्टता का परिचय दिया है। 17 जुलाई 2026 का दिन अस्पताल के इतिहास में एक विशेष उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया, जब एक ही दिन में जटिल न्यूरोसर्जरी के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी की अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का भी सफल ऑपरेशन कर उसे संभावित स्थायी लकवे से बचाया गया।










जानकारी के अनुसार श्री लल्लू यादव (55 वर्ष), निवासी विष्णुनगर, कुदुदंड, लगभग एक माह पूर्व गर्दन में असहनीय दर्द, लगातार बढ़ती तकलीफ तथा दोनों हाथों में कमजोरी की शिकायत लेकर श्री विजय वंदना हॉस्पिटल पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तृत न्यूरोलॉजिकल परीक्षण एवं आधुनिक रेडियोलॉजिकल जांच कराई, जिसमें पता चला कि मरीज बेसिलर इनवैजिनेशन (Basilar Invagination) नामक रीढ़ की हड्डी की अत्यंत दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी में गर्दन की ऊपरी हड्डी (ओडोन्टॉइड प्रोसेस) सामान्य स्थिति से ऊपर खिसककर खोपड़ी के आधार तक पहुंच जाती है। इससे स्पाइनल कॉर्ड पर लगातार दबाव पड़ता है और यदि समय रहते उपचार न किया जाए तो मरीज के दोनों हाथों और दोनों पैरों में स्थायी लकवा होने की पूरी संभावना रहती है। एक बार स्पाइनल कॉर्ड को गंभीर क्षति पहुंचने के बाद उसका उपचार अत्यंत कठिन हो जाता है।

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए श्री विजय वंदना हॉस्पिटल के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. विजय कुमार ने मामले का गहन अध्ययन किया और अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। 17 जुलाई 2026 को मरीज की C-2 फिक्सेशन, ऑक्सिपिटल फिक्सेशन एवं फोरामेन मैग्नम डीकम्प्रेशन जैसी अत्यंत जटिल और उच्च स्तरीय स्पाइन सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह ऑपरेशन स्पाइन सर्जरी की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है, जिसमें अत्यधिक सटीकता, अनुभव और आधुनिक तकनीक की आवश्यकता होती है।

ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय टीम ने रीढ़ की हड्डी एवं स्पाइनल कॉर्ड पर पड़ रहे दबाव को सफलतापूर्वक दूर किया तथा प्रभावित हिस्से को स्थिर कर मरीज की स्थिति को सुरक्षित बनाया। पूरी सर्जरी अत्यंत सावधानी और उच्च चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप संपन्न की गई।

सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल टीम ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार नियमित देखभाल, फिजियोथेरेपी, दवाओं एवं आवश्यक सावधानियों के साथ उपचार जारी रखा। उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए और धीरे-धीरे मरीज की गर्दन का दर्द कम होने लगा तथा हाथों की कमजोरी में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

स्वास्थ्य में लगातार सुधार होने के बाद श्री लल्लू यादव को पूर्ण रूप से स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के दौरान मरीज एवं उनके परिजनों ने भावुक होकर डॉ. विजय कुमार तथा श्री विजय वंदना हॉस्पिटल की पूरी टीम के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समय पर सही जांच, सटीक निदान और विशेषज्ञ सर्जरी के कारण उन्हें नया जीवन मिला तथा वे संभावित स्थायी लकवे जैसी गंभीर स्थिति से बच सके।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि श्री विजय वंदना हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी एवं कॉम्प्लेक्स स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में लगातार उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अनुभवी विशेषज्ञों, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, उन्नत तकनीक और समर्पित मेडिकल टीम के सहयोग से ऐसे जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है, जिन्हें कभी अत्यंत जोखिमपूर्ण माना जाता था।

17 जुलाई 2026 को लगातार दो अत्यंत जटिल सर्जरियों की सफलता ने यह साबित कर दिया कि श्री विजय वंदना हॉस्पिटल गंभीर न्यूरोसर्जरी एवं स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में प्रदेश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। अस्पताल की यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन मरीजों के लिए भी आशा की नई किरण है जो गंभीर मस्तिष्क एवं रीढ़ संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं।