1 अगस्त से बिजली दरों में बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर और बिजली बिल हाफ योजना को लेकर कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन
रायपुर, 31 जुलाई 2026। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी वापस लेने, स्मार्ट मीटर हटाने तथा 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना को पुनः लागू कराने की मांग को लेकर कांग्रेस 1 अगस्त से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
उन्होंने आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि—
आंदोलन का कार्यक्रम
1 अगस्त: प्रदेश के सभी जिलों में पत्रकार वार्ता आयोजित कर बिजली दरों में वृद्धि का विरोध किया जाएगा तथा बढ़ी हुई दरें वापस लेने की मांग की जाएगी।
2 अगस्त से: कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने और बिजली दरों में बढ़ोतरी वापस लेने की मांग को लेकर आम जनता से आवेदन एवं विरोध-पत्र भरवाएंगे। यह अभियान लगातार दो माह तक चलेगा।
दो माह बाद: जिलों में एकत्रित आवेदन-पत्रों के साथ विद्युत विभाग के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा तथा सभी आवेदन संबंधित अधिकारियों को सौंपकर उनकी पावती ली जाएगी।
अंतिम चरण: सभी जिलों से प्राप्त पावती के साथ मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री के पास ऊर्जा विभाग का भी प्रभार है, इसलिए उन्हें जनता की मांगों का जवाब देना चाहिए।
भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि जुलाई 2026 से घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली शुल्क में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट, गैर-घरेलू श्रेणी में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तथा कृषि पंपों की बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद यह बिजली दरों में पांचवीं बढ़ोतरी है।
उन्होंने कहा कि पहले ही 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) लगाया जा चुका है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक बिजली दरों में 31.23 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है, जबकि कांग्रेस सरकार ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में केवल 2 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की थी और उस समय 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना भी लागू थी।
स्मार्ट मीटर पर उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल तीन से चार गुना तक बढ़कर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना अनुबंधित भार (लोड) बढ़ाया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।
उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट मीटर अधिक बिजली खपत दर्ज कर रहे हैं, जिसके आधार पर अनुबंधित भार बढ़ाकर अतिरिक्त अर्थदंड सहित बिजली बिल भेजे जा रहे हैं।
दीपक बैज ने कहा कि अधिक बिजली बिल आने के तीन प्रमुख कारण हैं—
बिजली दरों में लगातार वृद्धि।
400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना का बंद होना।
स्मार्ट मीटर के कारण कथित रूप से अधिक खपत दर्ज होना।
उन्होंने कहा कि संसद में अप्रैल 2026 के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था है और उपभोक्ताओं की सहमति के बिना पारंपरिक मीटर को स्मार्ट मीटर में बदलना उचित नहीं है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर सरकार जवाब दे।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
बिजली दरों में की गई वृद्धि तत्काल वापस ली जाए।
400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना दोबारा लागू की जाए।
स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया वापस ली जाए।
कांग्रेस ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्मार्ट मीटर को लेकर पुनर्विचार किया गया है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार भी जनहित में ऐसा निर्णय ले।
"आदिवासियों को प्रदर्शन की वस्तु नहीं, शिक्षा और रोजगार चाहिए"
पत्रकार वार्ता में दीपक बैज ने कहा कि बस्तर पंडुम आदिवासी समाज की सांस्कृतिक परंपरा और पहचान का पर्व है, इसे सरकार के प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों को देश-विदेश ले जाने से आपत्ति नहीं है, लेकिन इससे युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी। उनका आरोप था कि बस्तर पंडुम के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और यह धन आदिवासी समाज के विकास पर खर्च होना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को केवल प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सरकार को दिखावे के बजाय आदिवासी क्षेत्रों के वास्तविक विकास पर ध्यान देना चाहिए।
— सुशील आनंद शुक्ला
अध्यक्ष, कांग्रेस संचार विभाग
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी
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