राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर विशेष सटीक आंकड़े ही सशक्त राष्ट्र की पहचान, विकास का सबसे विश्वसनीय आधार है सांख्यिकी
29 जून। प्रत्येक वर्ष 29 जून को पूरे भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारतीय सांख्यिकी के जनक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में सांख्यिकी के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विकास योजनाओं में सटीक एवं विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका को रेखांकित करना है।
आज के आधुनिक युग में सांख्यिकी केवल संख्याओं का विज्ञान नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की आर्थिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था की आधारशिला बन चुकी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार, पर्यावरण, जनसंख्या, गरीबी उन्मूलन तथा आधारभूत संरचना जैसे प्रत्येक क्षेत्र में बनाई जाने वाली योजनाएं विश्वसनीय आंकड़ों पर आधारित होती हैं। सही आंकड़े ही सरकारों को प्रभावी नीतियां बनाने, संसाधनों का उचित उपयोग करने तथा विकास की गति को नई दिशा देने में सहायता प्रदान करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती पारदर्शी और प्रमाणिक आंकड़ों पर निर्भर करती है। सांख्यिकी के माध्यम से सरकारें विकास कार्यों का मूल्यांकन करती हैं, भविष्य की योजनाएं तैयार करती हैं और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप निर्णय लेती हैं। यही कारण है कि सांख्यिकी को विकास का दर्पण और सुशासन का मजबूत आधार माना जाता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को तथ्यपरक सोच अपनाने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करना भी है। बदलते समय में डेटा आधारित निर्णय लेने की संस्कृति तेजी से बढ़ रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत हो रही है।
प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस का अमूल्य योगदान
प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस का जन्म 29 जून 1893 को हुआ था। वे भारत के महान सांख्यिकीविद्, वैज्ञानिक एवं योजनाकार थे। उन्होंने वर्ष 1931 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना की और देश में सांख्यिकीय अनुसंधान को नई दिशा दी। उनके द्वारा विकसित महालनोबिस दूरी (Mahalanobis Distance) आज भी विश्वभर में डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। भारत की पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान के सम्मान में प्रतिवर्ष 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस हमें यह संदेश देता है कि सशक्त राष्ट्र का निर्माण केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि सही तथ्यों, वैज्ञानिक सोच और विश्वसनीय आंकड़ों से होता है। जब निर्णय प्रमाणिक आंकड़ों पर आधारित होते हैं, तब विकास की गति तेज होती है और समाज अधिक समृद्ध एवं सशक्त बनता है।
"जहां तथ्य बोलते हैं, वहीं विकास की नई दिशा तय होती है। सांख्यिकी केवल आंकड़ों का विज्ञान नहीं, बल्कि समृद्ध भारत के निर्माण का सबसे विश्वसनीय आधार है।"

