सोमनाथ धाम के गरिमामय मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का हुआ सम्मान, गेड़ी लोक नृत्य के प्रख्यात कलाकार अनिल गढ़ेवाल एवं कथक नृत्यांगना वासंती वैष्णव हुए सम्मानित

 


बिलासपुर/सोमनाथ। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक विभूतियों की उपस्थिति में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर विशेष सम्मान मिला।

















इस गौरवपूर्ण अवसर पर गेड़ी लोक नृत्य के प्रख्यात कलाकार अनिल गढ़ेवाल एवं कथक नृत्यांगना श्रीमती वासंती वैष्णव को सोमनाथ धाम के गरिमामय मंच पर विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। मंच पर उपस्थित अतिथियों ने दोनों कलाकारों के दशकों से किए जा रहे सांस्कृतिक योगदान की मुक्त कंठ से सराहना की और उन्हें स्मृति चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।


यह सम्मान केवल दो कलाकारों का नहीं, बल्कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और परंपरा का सम्मान माना जा रहा है। दोनों कलाकारों ने वर्षों से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में पहचान दिलाने का कार्य किया है और नई पीढ़ी को भारतीय लोक एवं शास्त्रीय कला से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


अनिल गढ़ेवाल ने अपने गेड़ी लोक नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और सांस्कृतिक समर्पण ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। वहीं श्रीमती वासंती वैष्णव ने कथक नृत्य के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को जीवंत बनाए रखते हुए अनेक सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है।


'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' में छत्तीसगढ़ से साहित्य, लोककला, संगीत, रंगमंच, नृत्य और संस्कृति से जुड़े एक हजार से अधिक प्रतिष्ठित कलाकार, साहित्यकार एवं राज्य अलंकरण प्राप्त विभूतियों ने भाग लिया। यात्रा का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय एकता और विभिन्न राज्यों की लोक परंपराओं का आदान-प्रदान करना रहा।


यात्रा के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या में देशभर के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक एवं शास्त्रीय कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। छत्तीसगढ़ की प्रस्तुतियों ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया और दर्शकों ने कलाकारों का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।


सोमनाथ धाम जैसे ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल पर सम्मानित होने के बाद अनिल गढ़ेवाल एवं वासंती वैष्णव ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए जीवन का अविस्मरणीय क्षण है। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानते हुए संपूर्ण छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक कलाकारों को समर्पित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजन देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं।


सांस्कृतिक जगत से जुड़े कलाकारों, साहित्यकारों और समाज के विभिन्न वर्गों ने दोनों विभूतियों को इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।