छत्तीसगढ़ में तय मानकों के अनुसार लगाए जा रहे हैं स्मार्ट बिजली मीटर विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनाने की पहल अब गलत मीटर रीडिंग और अनुमानित बिलिंग पर लगेगा विराम
रायपुर, 19 जून 2026। छत्तीसगढ़ में लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटर किसी राज्य सरकार की अलग योजना नहीं, बल्कि भारत सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत संचालित राष्ट्रीय पहल का हिस्सा हैं। केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में देशभर में स्मार्ट मीटरिंग योजना लागू करने का निर्णय लिया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को कम करना, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा उपभोक्ताओं को सटीक और पारदर्शी बिलिंग सुविधा उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर परियोजना को लागू करने का निर्णय वर्ष 2022 में लिया गया था। निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने और कार्यादेश जारी होने के बाद फरवरी 2024 से प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू हुआ। वर्तमान सरकार पूर्व में जारी निविदाओं, अनुबंधों एवं कार्यादेशों के आधार पर परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है।
प्रदेश में लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से अब तक करीब 40 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।
उपभोक्ताओं को मिल रहे कई लाभ
स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली खपत का आंकड़ा प्रत्येक 30 मिनट में दर्ज होता है, जिससे उपभोक्ता अपनी ऊर्जा खपत पर बेहतर निगरानी रख सकते हैं। इसके साथ ही मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग दर्ज होने की संभावना समाप्त हो जाती है और बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनती है।
स्मार्ट मीटर बिजली भार, वोल्टेज और ऊर्जा खपत सहित अन्य तकनीकी आंकड़े भी रियल टाइम में उपलब्ध कराते हैं। इससे विद्युत वितरण कंपनी को नेटवर्क की स्थिति का लगातार विश्लेषण करने, ओवरलोडिंग, वोल्टेज उतार-चढ़ाव एवं आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सुविधा मिलती है।
इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध विद्युत आपूर्ति के रूप में मिलता है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार की योजना एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है।