राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक खोमन सिन्हा ने कलेक्टर भगवान सिंह उइके को भेंट की अंतरराष्ट्रीय शोध कृतियां एवं पुस्तकें

 गरियाबंद। शिक्षा, साहित्य और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं शोधकर्ता खोमन सिन्हा ने गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके से सौजन्य भेंट कर अपनी अंतरराष्ट्रीय शोध कृतियां एवं साहित्यिक पुस्तकों की प्रतियां भेंट कीं। यह मुलाकात ज्ञान, सम्मान और प्रेरणा का सुंदर संगम बन गई।









भेंट के दौरान श्री सिन्हा ने कलेक्टर महोदय को अपने दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रदान किए। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत समावेशी शिक्षा की उपयोगिता, नवीन शैक्षणिक प्रणाली की प्रभावशीलता तथा छत्तीसगढ़ की गोंड जनजाति के सांस्कृतिक एवं सामाजिक मूल्यों पर आधारित शोध शामिल हैं। इन शोध कार्यों में शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक विकास और जनजातीय जीवन के विविध आयामों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, जो शोधार्थियों, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

इस अवसर पर उन्होंने अपनी चर्चित पुस्तक "आजादी के नायक", दिव्यांगता विषयक साहित्य तथा "रत्नांचल छत्तीसगढ़" पुस्तक भी कलेक्टर महोदय को भेंट की। इन कृतियों के माध्यम से समाज में जागरूकता, राष्ट्रभक्ति, संवेदनशीलता और ज्ञान के प्रसार के लिए किए जा रहे अपने प्रयासों की जानकारी दी।

कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने श्री सिन्हा के शैक्षणिक, साहित्यिक और शोधपरक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि अपने शोध, लेखन और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज को नई दिशा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं तथा समाज की बौद्धिक और सांस्कृतिक समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भेंट के दौरान कलेक्टर महोदय ने आत्मीयता के साथ श्री सिन्हा का स्वागत करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया तथा शिक्षा, अनुसंधान और साहित्य के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य करते रहने के लिए शुभकामनाएं प्रदान कीं।

इस अवसर को अपने जीवन का एक गौरवपूर्ण एवं अविस्मरणीय क्षण बताते हुए श्री खोमन सिन्हा ने कहा कि कलेक्टर महोदय का स्नेह, सम्मान और मार्गदर्शन उन्हें समाज, शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में और अधिक समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।

ज्ञान, शोध और साहित्य के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का यह प्रयास निश्चित रूप से गरियाबंद जिले ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।