मां कौशल्या धाम की स्थापना हेतु छत्तीसगढ़ कलार समाज संत रामबालक दास जी के साथ : युवराज सिन्हा मां कौशल्या के साथ भगवान सहस्त्रबाहु की प्रतिमा स्थापना कलार समाज के लिए गौरव का विषय : शशि सिन्हा, महापौर रिसाली
बालोद, 13 जून।
छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर स्थित प्रसिद्ध आध्यात्मिक एवं धार्मिक केंद्र श्री जामड़ी पाटेश्वर आश्रम, जिला बालोद में निर्माणाधीन विश्व के प्रथम मां कौशल्या धाम को लेकर जनमानस में लगातार उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है। पुरुषोत्तम मास महोत्सव के पावन अवसर पर यहां विभिन्न समाजों के प्रदेश स्तरीय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 13 जून को छत्तीसगढ़ कलार समाज का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता के वातावरण में संपन्न हुआ।
सम्मेलन में प्रदेशभर से आए समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिलाएं एवं वरिष्ठजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य मां कौशल्या धाम के निर्माण में समाज की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा समाज को एकजुट कर धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ कलार समाज के प्रदेश अध्यक्ष युवराज सिन्हा ने कहा कि बालोद जिले का यह पवित्र स्थल आने वाले समय में विश्वभर में मां कौशल्या धाम के रूप में प्रसिद्ध होगा। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और गौरव का प्रतीक बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि समस्त कलार समाज के लिए यह अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है कि मां कौशल्या धाम परिसर में भगवान सहस्त्रबाहु (सहस्त्रार्जुन) भगवान की भव्य प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
युवराज सिन्हा ने कहा कि भगवान सहस्त्रबाहु कलार समाज के आराध्य देव हैं और उनकी प्रतिमा की स्थापना से समाज की धार्मिक आस्था को एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि प्रतिमा स्थापना एवं धाम निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ कलार समाज की ओर से 51 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि मां कौशल्या धाम के निर्माण की पूर्णता तक समस्त कलार समाज संत रामबालक दास जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं ने सहयोग किया, उसी प्रकार मां कौशल्या धाम के निर्माण में भी सभी समाजों और श्रद्धालुओं को बढ़-चढ़कर योगदान देना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में कलार society द्वारा इस पावन स्थल पर एक विशाल सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
कार्यक्रम में उपस्थित शशि सिन्हा, महापौर रिसाली ने अपने संबोधन में कहा कि मां कौशल्या छत्तीसगढ़ की पहचान और गौरव हैं। उनके नाम पर निर्मित हो रहा यह धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। उन्होंने कहा कि मां कौशल्या के साथ भगवान सहस्त्रबाहु की प्रतिमा स्थापना कलार समाज के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इससे समाज की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। मां कौशल्या धाम भविष्य में लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा तथा छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान को देश और दुनिया तक पहुंचाएगा।
सम्मेलन के दौरान समाज के वरिष्ठ एवं सम्मानित व्यक्तित्व स्वर्गीय रूप नारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनों ने दो मिनट का मौन रखकर उनके समाज सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद किया। इसके साथ ही समाज के वरिष्ठजनों, समाजसेवियों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाटेश्वर धाम के संचालक संत रामबालक दास जी महाराज ने कहा कि उनके आग्रह पर प्रदेशभर का कलार समाज बड़ी संख्या में इस पवित्र स्थल पर पहुंचा है, जिसके लिए वे समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि मां कौशल्या धाम का निर्माण केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं, बल्कि समस्त सनातन समाज को एक सूत्र में जोड़ने का अभियान है।
संत रामबालक दास जी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि सभी समाज, संगठन और सनातन धर्मावलंबी एकजुट होकर राष्ट्र, धर्म और समाज के उत्थान के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों रामभक्तों ने तन, मन और धन से सहयोग किया, उसी प्रकार मां कौशल्या धाम के निर्माण में भी सभी श्रद्धालुओं को अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मां कौशल्या केवल छत्तीसगढ़ की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के रामभक्तों की श्रद्धा का केंद्र हैं। उनके नाम पर बनने वाला यह भव्य धाम आने वाले समय में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता का केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम के अंत में मां कौशल्या धाम के शीघ्र निर्माण, समाज की उन्नति, प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना के साथ सामूहिक प्रार्थना की गई। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए कलार समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, महिला प्रतिनिधि, युवा साथी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



