गरियाबंद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्राथमिक शाला सिर्रीखुर्द के राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक एवं नवाचारी शिक्षाविद खोमन गुरुजी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि प्रकृति मानव जीवन की आधारशिला है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, हरियाली और जैव विविधता के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग, जल स्रोतों का क्षरण तथा वनों की अंधाधुंध कटाई पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
खोमन गुरुजी ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को वृक्षारोपण, सीड बॉल निर्माण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण एवं जैव विविधता संरक्षण जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे प्रकृति के सच्चे मित्र और भविष्य के पर्यावरण प्रहरी बन सकें।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए संकल्प लेने का अवसर है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण और संवर्धन का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा सकारात्मक बदलाव संभव है।
खोमन गुरुजी ने कहा, "धरती हमें जीवन, संसाधन और खुशहाली प्रदान करती है। इसलिए उसका संरक्षण करना हमारा परम कर्तव्य है। आइए, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हम सभी हरियाली बढ़ाने, जल बचाने और स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण का संकल्प लें।"
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाने तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
