उत्तर प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ से भी स्मार्ट मीटर हटाए सरकार : वंदना राजपूत

 रायपुर, 02 जून 2026। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद प्रदेशभर से बिजली उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आम नागरिकों का आरोप है कि वास्तविक खपत की तुलना में अधिक यूनिट दर्ज की जा रही है, जिसके कारण बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल इस माह दो से तीन गुना तक बढ़कर आए हैं।







वंदना राजपूत ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने भी स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इसे बदलने और वापस लेने का निर्णय लिया है। जब उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर सवाल स्वीकार कर रही है, तो छत्तीसगढ़ सरकार को भी जनता की परेशानियों को देखते हुए स्मार्ट मीटर योजना की समीक्षा कर इसे वापस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से यह शिकायत मिल रही है कि स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर की तुलना में अधिक तेजी से चल रहे हैं और वास्तविक खपत से अधिक रीडिंग दर्ज कर रहे हैं। प्रत्येक उपभोक्ता का अधिकार है कि उसे अपनी बिजली खपत की सही और पारदर्शी जानकारी मिले। पहले मीटर की जांच के लिए चेक मीटर की व्यवस्था उपलब्ध थी, लेकिन अब उपभोक्ताओं से मीटर जांच और चेक मीटर लगाने के नाम पर 1000 से 1500 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है।

वंदना राजपूत ने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को मीटर में गड़बड़ी की आशंका है, तो उसकी जांच निःशुल्क होनी चाहिए। अतिरिक्त शुल्क लगाना उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने जैसा है। सरकार को पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए मीटर जांच की व्यवस्था सरल और निशुल्क करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले 400 यूनिट तक मिलने वाली बिजली राहत को घटाकर 200 यूनिट कर दिया और इसके साथ ऐसी शर्तें जोड़ दीं कि निर्धारित सीमा पार होते ही पूरी राहत समाप्त हो जाती है। अब स्मार्ट मीटर के माध्यम से बढ़े हुए बिलों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इससे आम उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ गई है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की कि राज्य सरकार स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराए तथा जनता के हित में स्मार्ट मीटर योजना को वापस लेने पर विचार करे।

वंदना राजपूत

प्रवक्ता

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी