सेवा, समर्पण और सफलता के दो स्वर्णिम वर्ष: 45 हजार से अधिक मरीजों के भरोसे का केंद्र बना श्री विजय वंदना हॉस्पिटल द्वितीय वर्षगांठ पर उपलब्धियों का जश्न, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का लिया संकल्प

 बिलासपुर। स्वास्थ्य सेवा केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। इसी भावना को साकार करते हुए बिलासपुर का प्रतिष्ठित श्री विजय वंदना हॉस्पिटल लगातार दो वर्षों से हजारों मरीजों के जीवन में उम्मीद और स्वास्थ्य का नया प्रकाश लेकर आया है। अस्पताल ने 18 जून 2026 को अपनी द्वितीय वर्षगांठ बड़े ही उत्साह, गरिमा और आत्मीय वातावरण में मनाई। यह अवसर केवल एक वर्षगांठ का नहीं, बल्कि उन हजारों सफल उपचारों, अनगिनत मुस्कानों और मरीजों के विश्वास का उत्सव था, जिसने अस्पताल को क्षेत्र की अग्रणी स्वास्थ्य संस्थाओं में शामिल कर दिया है।









कार्यक्रम में अस्पताल के डायरेक्टर्स, वरिष्ठ चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, प्रशासनिक अधिकारी एवं सहयोगी कर्मचारियों ने सहभागिता कर पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों को याद किया और भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रूपरेखा पर विचार साझा किया।

45 हजार से अधिक मरीजों को मिला नया जीवन और बेहतर स्वास्थ्य

अस्पताल प्रबंधन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, स्थापना से लेकर अब तक श्री विजय वंदना हॉस्पिटल ने 45,000 से अधिक मरीजों को ओपीडी एवं आईपीडी सेवाओं के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अनुभवी डॉक्टरों की टीम और संवेदनशील सेवा भाव के कारण अस्पताल ने कम समय में ही मरीजों के बीच एक मजबूत पहचान बनाई है।

विशेष रूप से क्रिटिकल केयर, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के विस्तार ने अस्पताल को क्षेत्र की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संस्थान बना दिया है।

दीप प्रज्वलन और गुरु घासीदास जी की आरती के साथ हुआ शुभारंभ

द्वितीय वर्षगांठ समारोह का शुभारंभ अस्पताल के डायरेक्टर्स द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पूज्य संत गुरु घासीदास जी की आरती के साथ किया गया। आध्यात्मिक वातावरण के बीच उपस्थित सभी लोगों ने अस्पताल की निरंतर प्रगति और जनसेवा के संकल्प को दोहराया।

इसके बाद सभी डायरेक्टर्स एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में केक काटकर वर्षगांठ का उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर पूरे अस्पताल परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

डॉक्टरों और कर्मचारियों की मेहनत को मिला सम्मान

अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. विजय कुमार तथा बोर्ड मेंबर्स डॉ. गणेश्वरी पात्रे, डॉ. संतोष उद्देश, डॉ. राजेश्वरी उद्देश एवं टी.आर. (बाबा) पात्रे ने अपने संबोधन में कहा कि अस्पताल की सफलता के पीछे डॉक्टरों, नर्सों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशासनिक टीम की अथक मेहनत, अनुशासन और सेवा भावना का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है और श्री विजय वंदना हॉस्पिटल ने अपने कार्यों से मरीजों एवं उनके परिजनों का विश्वास अर्जित किया है। यह उपलब्धि केवल प्रबंधन की नहीं बल्कि पूरे अस्पताल परिवार की सामूहिक सफलता है।

रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

समारोह के दौरान विभिन्न विभागों के कर्मचारियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। गीत, नृत्य और मनोरंजक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। अस्पताल परिवार ने अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं और टीम भावना को और मजबूत किया।

कर्मचारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण बनाते हैं बल्कि संस्थान के प्रति जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना को भी बढ़ाते हैं।

भविष्य की ओर बढ़ते कदम, आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष फोकस

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि आने वाले समय में संस्थान चिकित्सा अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ करेगा। अत्याधुनिक मशीनों, नई चिकित्सा तकनीकों और विशेषज्ञ सेवाओं को शामिल कर मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

साथ ही ग्रामीण एवं जरूरतमंद वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक पहल को भी आगे बढ़ाया जाएगा।

विश्वास, सेवा और मानवता का प्रतीक बन रहा अस्पताल

सिर्फ दो वर्षों में 45 हजार से अधिक मरीजों का सफल उपचार और लगातार बढ़ता जनविश्वास इस बात का प्रमाण है कि श्री विजय वंदना हॉस्पिटल स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित कर रहा है। मरीजों की देखभाल, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और सेवा के प्रति समर्पण के साथ यह संस्थान आने वाले वर्षों में भी स्वास्थ्य क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए अग्रसर है।

द्वितीय वर्षगांठ का यह आयोजन अस्पताल परिवार के लिए गर्व, प्रेरणा और नए संकल्प का प्रतीक बनकर यादगार बन गया।