राजीव ध्रुव के नेतृत्व में कोल वाशरी विस्तार के खिलाफ आदिवासियों का बड़ा आंदोलन, 24 जून की जनसुनवाई का होगा विरोध 200 आदिवासियों के साथ ग्राम कर्रा पहुंचेंगे राजीव ध्रुव, कहा – जनता की आवाज दबाने नहीं देंगे

 बिलासपुर। मस्तूरी विकासखंड के ग्राम गतौरा में संचालित हिन्द एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड (हिन्द ग्रुप) की कोल वाशरी के प्रस्तावित क्षमता विस्तार को लेकर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। अब इस आंदोलन को नया आयाम देते हुए छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी युवा प्रभाग के प्रांतीय महासचिव राजीव ध्रुव ने 24 जून 2026 को ग्राम कर्रा में आयोजित होने वाली जनसुनवाई का विरोध करने का ऐलान किया है।








राजीव ध्रुव ने कहा कि वे लगभग 200 आदिवासी साथियों के साथ ग्राम कर्रा पहुंचकर जनसुनवाई का विरोध करेंगे और प्रभावित ग्रामीणों की आवाज बुलंद करेंगे। उनका आरोप है कि कोल वाशरी विस्तार की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संचालित नहीं किया जा रहा है तथा स्थानीय जनता को पर्याप्त जानकारी दिए बिना जनसुनवाई आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

जनसुनवाई को लेकर उठ रहे सवाल

क्षेत्र के ग्रामीणों, किसान संगठनों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि 24 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई की जानकारी प्रभावित गांवों तक व्यापक रूप से नहीं पहुंचाई गई है। लोगों का कहना है कि हजारों ग्रामीणों के जीवन, पर्यावरण और कृषि से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर खुली और पारदर्शी चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन जानकारी के अभाव ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।

राजीव ध्रुव ने कहा कि जनसुनवाई केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं बल्कि जनता के अधिकारों से जुड़ी प्रक्रिया है। यदि प्रभावित लोगों को ही जानकारी नहीं मिलेगी तो उनकी आपत्तियां और सुझाव कैसे सामने आएंगे।

पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे ग्रामीण

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान क्षमता में संचालित कोल वाशरी से निकलने वाली कोयले की धूल ने आसपास के गांवों का जीवन प्रभावित कर दिया है। गतौरा, कर्रा, फरहदा, लगरा, खैरा सहित अनेक गांवों में लोगों को सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों में कोयले की काली धूल और राख की परत जमने से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई किसानों ने उत्पादन में गिरावट और भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने की शिकायत भी की है।

जे.के. कॉलेज और विद्यार्थियों पर भी असर

क्षेत्र के प्रतिष्ठित जे.के. कॉलेज के आसपास रहने वाले लोगों और विद्यार्थियों का कहना है कि कोल वाशरी से उड़ने वाली धूल कॉलेज परिसर तक पहुंचती है। क्लासरूम, खेल मैदान और भवनों पर लगातार धूल जमने से अध्ययन का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

विद्यार्थियों का कहना है कि यदि क्षमता विस्तार को मंजूरी मिलती है तो प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होंगे।

जल स्रोतों और अरपा नदी को खतरा

पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कोयला धुलाई से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ स्थानीय जल स्रोतों को प्रभावित कर रहे हैं। उनका कहना है कि अरपा नदी और उससे जुड़े नालों में प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि क्षमता विस्तार किया गया तो जल प्रदूषण की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है, जिसका असर आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई देगा।

भू-जल दोहन पर भी चिंता

किसानों का कहना है कि कोल वाशरी संचालन में बड़े पैमाने पर भू-जल का उपयोग किया जा रहा है। इससे आसपास के गांवों में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। कई बोरवेल और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता कम होने की शिकायतें सामने आई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जहां किसान सिंचाई और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, वहीं उद्योगों द्वारा बड़े पैमाने पर पानी का उपयोग किया जाना चिंता का विषय है।

रोजगार और सीएसआर के वादों पर भी सवाल

स्थानीय युवाओं का आरोप है कि उद्योग स्थापना के समय रोजगार देने के जो वादे किए गए थे, वे पूरी तरह पूरे नहीं हुए। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और आधारभूत सुविधाओं के विकास में अपेक्षित योगदान नहीं दिया गया।

राजीव ध्रुव बोले – आदिवासी हितों से समझौता नहीं

प्रांतीय महासचिव राजीव ध्रुव ने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण समाज की भूमि, जल, जंगल और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान समस्याओं का समाधान किए बिना क्षमता विस्तार को मंजूरी देने का प्रयास किया गया तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 24 जून को वे 200 से अधिक आदिवासी साथियों के साथ ग्राम कर्रा पहुंचकर जनसुनवाई में अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे और प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।

24 जून की जनसुनवाई पर टिकी सबकी नजर

क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों, छात्रों और सामाजिक संगठनों की निगाहें अब 24 जून को ग्राम कर्रा में प्रस्तावित जनसुनवाई पर टिकी हैं। एक ओर कंपनी क्षमता विस्तार की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते विरोध ने प्रशासन और पर्यावरण विभाग के सामने पारदर्शिता और जनहित सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

अब देखना होगा कि जनसुनवाई में ग्रामीणों की चिंताओं को कितना महत्व दिया जाता है और क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।