किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, 12 सूत्रीय मांगों पर सरकार दे जवाब : विमलेश तिवारी किसान कांग्रेस ने किया सूरजपुर कलेक्ट्रेट का घेराव, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

 सूरजपुर, 8 जून 2026। छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत सोमवार को जिला किसान कांग्रेस सूरजपुर द्वारा किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया गया। किसान कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं किसानों ने बड़ी संख्या में एकत्र होकर सूरजपुर कलेक्ट्रेट का घेराव किया तथा मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।











इस अवसर पर छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सूरजपुर जिले के प्रभारी विमलेश तिवारी ने कहा कि प्रदेश के किसान आज खाद, बिजली, डीजल, पेट्रोल और कृषि ऋण जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार किसानों की परेशानियों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों पर कुठाराघात करने वाले फैसलों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए, अन्यथा किसान कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज करेगी।

विमलेश तिवारी ने कहा कि सरकार द्वारा प्रति एकड़ खाद की मात्रा में कटौती का निर्णय पूरी तरह किसान विरोधी है। खेती-किसानी के महत्वपूर्ण समय में किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल आदेश वापस लेने की मांग की।

किसान कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की कि किसानों को तीन किश्तों में खाद वितरण की अव्यावहारिक व्यवस्था को समाप्त किया जाए तथा आवश्यकतानुसार एकमुश्त खाद उपलब्ध कराई जाए। साथ ही डीजल एवं पेट्रोल की सुलभ आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए जरीकन में तेल लेने पर लगी रोक को हटाया जाए ताकि किसानों को कृषि कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

ज्ञापन में बिजली की बढ़ती दरों को वापस लेने, किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने तथा कृषि कार्यों के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। किसान कांग्रेस ने प्रदेशभर में खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाने और खाद की एक समान दर निर्धारित करने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में किसानों को विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग कीमतों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण की सीमा बढ़ाकर प्रति एकड़ 40 हजार रुपये करने की मांग करते हुए कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को मिलने वाला ऋण वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा कृषि उपज की राशि का एकमुश्त भुगतान करने, कृषि विभाग की योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता लाने तथा लंबित अनुदान राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

प्रदेश महासचिव जसवंत सिंह, बृजेश मिश्रा, दीपक मानिकपुरी, दिलीप सोनी, प्रदेश सचिव बालेश्वर नेम एवं देवेश राजवाड़े ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में किसान लगातार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सरकार को किसानों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर तत्काल समाधान निकालना चाहिए।

जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष सचिंद्र पाठक ने कहा कि किसान कांग्रेस किसानों के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी। यदि सरकार किसानों की जायज मांगों को अनदेखा करती है तो आने वाले समय में और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

इस दौरान जिला किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष लक्ष्मण राजवाड़े, महामंत्री वेद प्रकाश मिश्रा, जिला सेवा दल अध्यक्ष आनंद चौधरी, ब्लॉक अध्यक्ष राजेश्वर प्रजापति, बसराम सिंह, रितेश तिवारी, विनोद नेताम, नूर सलाम, उमेश मिश्रा, उमाशंकर चौधरी, जिला उपाध्यक्ष इंद्रजीत शर्मा, कमल सिंह कोराम, जिला महामंत्री बृजलाल लकड़ा, सीताराम साहू, राजेंद्र साहू, अनिल मिश्रा, जिला सचिव बघोलन राम, रिजवान खान, सुपारी लाल राजवाड़े, फुलेश्वरी सिंह, मातेश्वरी वैष्णो, सुशील उइके, बिंदेश्वर कुशवाहा, कुलेश्वर राजवाड़े, दिलकेश्वर प्रसाद सहित किसान कांग्रेस के सैकड़ों पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं किसान उपस्थित रहे।

मुख्य मांगें

प्रति एकड़ खाद कटौती का आदेश वापस लिया जाए।

तीन चरणों में खाद वितरण की व्यवस्था समाप्त की जाए।

डीजल-पेट्रोल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

जरीकन में तेल लेने पर लगी रोक हटाई जाए।

बिजली दरों में वृद्धि वापस ली जाए।

किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाए।

खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।

पूरे प्रदेश में खाद की एक समान दर लागू की जाए।

केसीसी ऋण सीमा बढ़ाकर ₹40,000 प्रति एकड़ की जाए।

कृषि उपज का एकमुश्त भुगतान किया जाए।

कृषि विभाग की योजनाओं में पारदर्शिता लाई जाए।

लंबित अनुदान राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए।

किसान कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशभर में और व्यापक रूप दिया जाएगा।