धोखाधड़ी कर फर्जी रजिस्ट्री से आदिवासी जमीनों पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार किसानों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन TGB MEDIA | ब्यूरो रिपोर्ट : जोगा (जय) मण्डावी, बस्तर संभाग मीडिया प्रभारी सुकमा, छत्तीसगढ़।

 उप तहसील गादीरास क्षेत्र में आदिवासी किसानों की जमीनों पर कथित फर्जी रजिस्ट्री, भूमि विवाद, नामांतरण और जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी समस्याओं को लेकर मूल बस्तरिया समाज कल्याण संघ एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की गई।







ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के भोले-भाले आदिवासी किसानों के साथ धोखाधड़ी कर उनकी जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री कराई जा रही है। ज्ञापन में कहा गया कि कई पीढ़ियों से आदिवासी परिवार जिन जमीनों पर खेती-किसानी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं, उन जमीनों के पट्टे आज तक नहीं बन पाए हैं। वहीं बाहरी लोग अधिकारियों से सांठगांठ कर कम समय में जमीनों पर कब्जा कर पट्टे हासिल कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन जमीनों पर पहले से पट्टे बने हुए हैं, वहां भी कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से रजिस्ट्री कर कब्जा किया जा रहा है। इससे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है और लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था एवं न्याय प्रक्रिया से विश्वास उठता जा रहा है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि किसानों की मालिक मकबूजा भूमि पर लगे कीमती सागौन वृक्षों को हड़पने के उद्देश्य से कुछ बिचौलियों और भू-माफियाओं द्वारा किसानों को गुमराह कर जमीन अपने नाम दर्ज कराई गई है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा सभी फर्जी रजिस्ट्रियों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि जिन परिवारों के नाम एक ही पट्टे में दर्ज हैं, उनके आपसी सहमति और वास्तविक कब्जे के आधार पर पृथक बंटवारा एवं नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि भविष्य में पारिवारिक विवादों से बचा जा सके।

फौती नामांतरण की जटिल प्रक्रिया को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जिन भू-स्वामियों का निधन हो चुका है, उनके वारिसों को नामांतरण कराने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान हेतु गांव स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने की मांग की गई।

इसके साथ ही जाति प्रमाण पत्र निर्माण की जटिल प्रक्रिया को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि दस्तावेजी जटिलताओं और कड़े नियमों के कारण कई विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं, जिससे वे छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा और विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। ज्ञापन में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमों में शिथिलता और प्राथमिकता के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की गई।

यह ज्ञापन उप तहसील गादीरास क्षेत्र के ग्रामवासियों, किसान प्रतिनिधियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से सौंपा गया, जिसमें गीता कवासी सहित कई पंचायत प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि किसानों, विद्यार्थियों और ग्रामीण परिवारों के भविष्य से जुड़े इन संवेदनशील मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।