विश्व तंबाकू निषेध दिवस : जीवन की श्वास बचाने का वैश्विक संकल्प तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण के लिए जनजागरण और स्वास्थ्य चेतना की आवश्यकता लेखिका : शांति सोनी वरिष्ठ व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महमंद विकासखंड बिल्हा, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़) "स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है, न कि सोने और चाँदी के टुकड़े।" — महात्मा गांधी
मानव जीवन प्रकृति का सबसे अनमोल उपहार है, किंतु तंबाकू जैसी घातक लत इस अमूल्य जीवन को धीरे-धीरे विनाश की ओर ले जा रही है। इसी गंभीर चुनौती के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण का वैश्विक संकल्प है।
तंबाकू आधुनिक समाज का ऐसा मधुर विष है, जो प्रारंभ में आकर्षण का भ्रम उत्पन्न करता है, किंतु अंततः व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पाद शरीर को उसी प्रकार भीतर से कमजोर करते हैं, जैसे दीमक किसी मजबूत वृक्ष को खोखला कर देती है।
युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा
आज युवाओं में तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बन चुकी है। मित्रों के दबाव, फैशन, जिज्ञासा अथवा दिखावे की प्रवृत्ति के कारण अनेक किशोर और युवा इस लत के शिकार हो जाते हैं। प्रारंभ में यह केवल एक आदत प्रतीत होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति की स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य को अपनी गिरफ्त में ले लेती है।
विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू की लत केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यक्ति को प्रभावित करती है। इससे व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता और जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण
तंबाकू सेवन मुख कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, श्वसन संबंधी विकारों तथा अनेक असाध्य रोगों का प्रमुख कारण है। इससे केवल सेवन करने वाला व्यक्ति ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि उसके परिवार और आसपास रहने वाले लोग भी इसके दुष्प्रभावों का सामना करते हैं।
निष्क्रिय धूम्रपान का धुआँ बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध होता है। इस प्रकार तंबाकू का धुआँ केवल वातावरण को प्रदूषित नहीं करता, बल्कि परिवारों के सपनों और संभावनाओं को भी धूमिल कर देता है।
आर्थिक और सामाजिक संकट का कारण
तंबाकू व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। एक ओर व्यक्ति अपनी आय का बड़ा हिस्सा इस विनाशकारी आदत पर खर्च करता है, वहीं दूसरी ओर तंबाकू जनित बीमारियों के उपचार में भारी धनराशि खर्च करनी पड़ती है। परिणामस्वरूप परिवार आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना करता है।
जिस धन का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और विकास के लिए किया जा सकता था, वही धन बीमारी और पीड़ा का कारण बन जाता है।
जागरूकता ही सबसे प्रभावी उपाय
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें आत्मचिंतन और जागरूकता का अवसर प्रदान करता है। यह दिवस संदेश देता है कि जीवन की वास्तविक शक्ति नशे में नहीं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच में निहित है।
विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और परिवारों को मिलकर ऐसे अभियान चलाने चाहिए, जो युवाओं को तंबाकू के दुष्परिणामों से अवगत करा सकें। रैलियाँ, हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक, संगोष्ठियाँ और संवाद कार्यक्रम जन-जागरण के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
विद्यालयों में इस दिवस की उपयोगिता
विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों की पाठशाला भी हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस का आयोजन विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन मूल्यों का विकास करता है।
विद्यार्थी राष्ट्र का भविष्य हैं। यदि उनमें तंबाकू के प्रति घृणा और स्वस्थ जीवन के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो जाए, तो एक स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण सहज संभव है। विद्यालयों से निकलने वाला यह संदेश घर-घर तक पहुँचकर व्यापक जनजागरण का माध्यम बन सकता है।
निष्कर्ष
विश्व तंबाकू निषेध दिवस केवल एक दिवस नहीं, बल्कि मानवता को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाने वाला जनआंदोलन है। आज आवश्यकता है कि हम स्वयं तंबाकू से दूर रहें और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें।
आइए, इस अवसर पर हम सब यह संकल्प लें कि तंबाकू मुक्त जीवन अपनाएंगे, स्वास्थ्य को प्राथमिकता देंगे और एक जागरूक, स्वस्थ तथा नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। तभी जीवन का उपवन स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के पुष्पों से महक सकेगा।



