मस्तूरी विकासखंड में हायर सेकेंडरी व्याख्याताओं हेतु ब्लूप्रिंट आधारित प्रशिक्षण का सफल आयोजन नई शिक्षा नीति, ब्लूम टैक्सोनॉमी एवं आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण

 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) पेंड्रा के निर्देशानुसार विकासखंड मस्तूरी, जिला बिलासपुर में हायर सेकेंडरी स्तर के कला एवं भाषा समूह के व्याख्याताओं हेतु ब्लूप्रिंट आधारित प्रशिक्षण के द्वितीय चरण का शुभारंभ 19 मई 2026 से किया गया। यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण 23 मई 2026 तक सेजेस कन्या विद्यालय मस्तूरी में प्रतिदिन प्रातः 9:30 बजे से सायं 5:30 बजे तक आयोजित किया गया।












इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों एवं नवीन मूल्यांकन प्रणाली से दक्ष बनाना था, ताकि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण, विद्यार्थीकेंद्रित एवं परिणाममुखी शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रशिक्षण के प्रथम दिवस से ही शिक्षकों में विशेष उत्साह, जिज्ञासा एवं सीखने की ललक देखने को मिली। कार्यक्रम में विकासखंड स्तर के व्याख्याताओं को नई शिक्षा प्रणाली के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया। इस दौरान डीआरजी मास्टर ट्रेनर शांति सोनी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की सोच, रचनात्मकता, विश्लेषण क्षमता एवं व्यवहारिक ज्ञान के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

शांति सोनी, डीआरजी मास्टर ट्रेनर एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद, विकासखंड बिल्हा, जिला बिलासपुर की व्याख्याता हैं। उन्होंने अपने अनुभव, प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण एवं व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को नवीन शिक्षण अवधारणाओं को सरल और सहज रूप में समझाया। प्रशिक्षण सत्रों में सहभागिता आधारित गतिविधियों एवं समूह चर्चा के माध्यम से शिक्षकों को सक्रिय रूप से जोड़ा गया।

प्रथम दिवस के प्रशिक्षण में ब्लूम टैक्सोनॉमी एवं नवीन ब्लूम टैक्सोनॉमी की अवधारणा पर विशेष चर्चा की गई। शांति सोनी ने शिक्षकों को बताया कि किस प्रकार विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच एवं रचनात्मक कौशल को विकसित करने के लिए नई मूल्यांकन प्रणाली तैयार की गई है। साथ ही पुराने एवं नवीन ब्लूप्रिंट के मध्य अंतर को उदाहरण सहित विस्तारपूर्वक समझाया गया, जिससे प्रतिभागियों को नई परीक्षा एवं मूल्यांकन पद्धति की स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो सकी।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों का प्री-टेस्ट भी आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से उनकी प्रारंभिक समझ एवं विषयगत दक्षता का आकलन किया गया। इससे प्रशिक्षकों को यह समझने में सहायता मिली कि शिक्षकों को किन विषयों पर अधिक मार्गदर्शन एवं अभ्यास की आवश्यकता है। प्रशिक्षण में प्रश्न निर्माण, विषय आधारित मूल्यांकन, गतिविधि आधारित शिक्षण एवं विद्यार्थियों की अधिगम क्षमता विकसित करने के आधुनिक तरीकों की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में उपस्थित व्याख्याताओं ने शांति सोनी की प्रशिक्षण शैली, उनके गहन ज्ञान एवं सहज प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी, प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी, रोचक एवं विद्यार्थीकेंद्रित बनेगी। साथ ही नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों की कार्यशैली में सकारात्मक परिवर्तन आएगा, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी व्याख्याताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। वहीं प्रशिक्षण प्रदान करने वाली डीआरजी मास्टर ट्रेनर शांति सोनी को श्रीफल, मोमेंटो एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी शिवराम टंडन ने विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “शांति सोनी बिल्हा विकासखंड से होकर भी ग्रीष्म अवकाश में मस्तूरी आकर हमारे व्याख्याताओं को इतना महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। इसके लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं।” उन्होंने शांति सोनी की प्रशिक्षण शैली एवं समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा भी की।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में विकासखंड शिक्षा अधिकारी शिवराम टंडन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी रही। वहीं पूरे कार्यक्रम के कुशल संयोजन में प्रमोद पांडे का विशेष योगदान रहा। उनके मार्गदर्शन एवं उत्कृष्ट व्यवस्थापन के कारण प्रशिक्षण अनुशासित, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को समयानुकूल अद्यतन रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नई शिक्षा नीति एवं आधुनिक शिक्षण तकनीकों पर आधारित यह प्रशिक्षण निश्चित रूप से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।