ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक कदम महिलाओं के नेतृत्व में संचालित होगी ‘द्वीप्ति योजना’

 रायपुर, 15 मई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा क्षेत्र में सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए महत्वाकांक्षी ‘द्वीप्ति योजना’ को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई है। यह योजना प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा संपत्तियों की स्वामी, संचालक और तकनीकी प्रबंधक के रूप में नई पहचान दिलाएगी।







पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में संचालित होने वाली इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिला नेतृत्व आधारित हरित ऊर्जा क्रांति की शुरुआत करना है।

‘सोलर दीदी’ बनेंगी ग्रामीण ऊर्जा परिवर्तन का चेहरा

योजना के तहत ग्राम स्तर पर ‘सोलर दीदी’ (ऊर्जा सखी) का एक विशेष कैडर तैयार किया जाएगा। चयनित महिलाओं को सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना, संचालन और तकनीकी रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षित महिलाएं गांवों में सोलर मिल, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई प्रणालियों और अन्य सौर ऊर्जा आधारित संपत्तियों के संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगी।

यह पहल दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में तकनीकी खराबियों की समस्या का स्थायी समाधान बनेगी, जिससे ग्रामीण अधोसंरचना निरंतर सक्रिय और सुचारु बनी रहेगी।

CLF बनेंगे महिला ऊर्जा सहकारी समितियां

योजना के अंतर्गत क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) को सशक्त बनाकर महिला नेतृत्व वाली ऊर्जा सहकारी समितियों में परिवर्तित किया जाएगा। ये समितियां सामूहिक रूप से ऊर्जा संपत्तियों का संचालन करेंगी। इन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अधिकृत विक्रेता एवं चैनल पार्टनर के रूप में जोड़ा जा रहा है।

महासमुंद और बस्तर जिले के CLF पहले ही विक्रेता के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं। राज्य स्तर पर उपकरणों की थोक खरीद से लागत कम होगी, जबकि स्थानीय स्तर पर सोलर दीदी बिक्री और सर्विसिंग का कार्य संभालेंगी।

सस्ती ऊर्जा के लिए अभिनव भुगतान मॉडल

ग्रामीण उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘द्वीप्ति योजना’ में ‘पे-पर-यूज़’ (Pay-per-Use) और ‘पे-एज़-यू-गो’ (Pay-as-you-go) मॉडल अपनाए गए हैं। इसके तहत उपभोक्ताओं को केवल उपयोग की गई ऊर्जा के अनुसार ही भुगतान करना होगा।

महिला ऊर्जा उद्यमों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शासन ने पंचायतों के रखरखाव अनुबंधों में 25 प्रतिशत कार्य विशेष रूप से इन समितियों के लिए आरक्षित रखने का निर्णय लिया है।

‘बिहान’ नेटवर्क के माध्यम से होगा क्रियान्वयन

योजना का प्रारूप ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है और इसका क्रियान्वयन राज्य के प्रसिद्ध ‘बिहान’ नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा। इसमें प्रदेश के लगभग 2.7 लाख स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

यह मॉडल न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, आजीविका और नेतृत्व के नए अवसर भी तैयार करेगा। ‘द्वीप्ति योजना’ छत्तीसगढ़ को महिला नेतृत्व आधारित ग्रीन डेवलपमेंट मॉडल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली दूरदर्शी पहल साबित होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान

“छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हमारी मातृशक्ति का योगदान सदैव अनुकरणीय रहा है। ‘द्वीप्ति योजना’ के माध्यम से हम राज्य की ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा क्षेत्र में उपभोक्ता से स्वामी और प्रबंधक बनाने जा रहे हैं। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेट जीरो’ और ‘हरित भारत’ के संकल्प को साकार करने में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी।

हमारी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर गांव ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बने और इस बदलाव का नेतृत्व हमारी ‘सोलर दीदियां’ करें। जब ग्रामीण महिलाएं आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों का प्रबंधन स्वयं संभालेंगी, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण विकास को स्थायी और स्वच्छ आधार भी मिलेगा। ‘द्वीप्ति योजना’ विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक और मजबूत कदम है।”

— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़