शांति सोनी बनीं मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता की मिसाल, 5000 से अधिक किशोरियों तक पहुंचाया स्वास्थ्य और आत्मसम्मान का संदेश

 बिलासपुर। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद, विकासखंड बिल्हा में पदस्थ व्याख्याता श्रीमती शांति सोनी द्वारा किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सशक्तिकरण के लिए चलाया जा रहा मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियान आज एक प्रेरणादायक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। वर्ष 2025 से प्रारंभ इस अभियान के माध्यम से अब तक लगभग 5000 से अधिक किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण, एनीमिया नियंत्रण, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा चुका है।













ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करते हुए शांति सोनी ने निकटता से अनुभव किया कि आज भी मासिक धर्म को लेकर समाज में अनेक भ्रांतियां, संकोच और मिथक व्याप्त हैं। अनेक किशोरियां इस प्राकृतिक प्रक्रिया के दौरान असहजता, शर्म और सामाजिक भेदभाव का सामना करती हैं। अशिक्षा और जागरूकता के अभाव के कारण कई बालिकाएं संक्रमण, एनीमिया और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझती रही हैं।

इन परिस्थितियों को बदलने का संकल्प लेते हुए शांति सोनी ने विद्यालय स्तर से लेकर संकुल स्तर तक व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की। उन्होंने केवल छात्राओं को ही नहीं, बल्कि उनकी माताओं और परिवारों को भी इस अभियान से जोड़ा। विशेष बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का कार्य किया गया।

शांति सोनी के प्रयासों से विद्यालयों में स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालय व्यवस्था को सुदृढ़ करने, सेनेटरी नैपकिन मशीन तथा इंसीनरेटर की स्थापना के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की गई। उनका मानना है कि जब तक विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक किशोरियां पूर्ण आत्मविश्वास के साथ शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकेंगी।

विद्यालय में प्रतिवर्ष 6 से 7 विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है, जिनमें महिला चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आमंत्रित कर किशोरियों की जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान कराया जाता है। इन कार्यशालाओं से छात्राओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा उनमें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास हुआ है।

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर शांति सोनी द्वारा शपथ एवं हस्ताक्षर अभियान भी संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से 10 हजार किशोरियों एवं महिलाओं को जागरूक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान केवल स्वास्थ्य जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि नारी गरिमा, आत्मसम्मान और सामाजिक चेतना को मजबूत करने का सशक्त माध्यम बन रहा है।

शांति सोनी का मानना है कि मासिक धर्म कोई बीमारी, दोष या संकोच का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक सामान्य एवं सम्मानजनक प्रक्रिया है। समाज में जब इस विषय पर खुलकर संवाद होगा, तभी किशोरियां आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सशक्त बन सकेंगी।

उनके निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि आज अनेक परिवारों में मासिक धर्म को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हुई है। माताएं अपनी बेटियों को संकोच नहीं, बल्कि सम्मान और जागरूकता के साथ इस प्राकृतिक प्रक्रिया को स्वीकार करना सिखा रही हैं।

श्रीमती शांति सोनी का यह अभियान ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य जागरूकता, महिला सम्मान और सामाजिक परिवर्तन की एक अनुकरणीय पहल बनकर उभरा है। उनके प्रयास न केवल हजारों किशोरियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं, बल्कि एक स्वस्थ, जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।