डॉ. उदय धाबर्डे के नेतृत्व में जेएलएन अस्पताल के बर्न यूनिट ने रचा जीवन बचाने का उदाहरण 50 प्रतिशत तक झुलसे मासूम को मिला नया जीवन, संवेदनशील उपचार और मानवीय देखभाल बनी उम्मीद की किरण

 भिलाई नगर, 23 मई 2026।

भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र का एडवांस बर्न केयर यूनिट आज छत्तीसगढ़ में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए उम्मीद, विश्वास और जीवनदान का पर्याय बनता जा रहा है। अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अनुभवी चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण इस यूनिट ने एक बार फिर ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसने चिकित्सा सेवा को केवल इलाज नहीं बल्कि मानवता की मिसाल बना दिया।









हाल ही में इस यूनिट ने लगभग 50 प्रतिशत तक गंभीर रूप से झुलसे एक मासूम बच्चे का सफल उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सकीय दक्षता का प्रमाण है, बल्कि मरीज और उसके परिवार के प्रति अस्पताल की संवेदनशीलता, समर्पण और मानवीय दृष्टिकोण को भी दर्शाती है।

डॉ. उदय धाबर्डे के नेतृत्व में मिला नया जीवन

बर्न विभागाध्यक्ष एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय धाबर्डे ने बताया कि अमेरिकन बर्न एसोसिएशन के मानकों के अनुसार बच्चों में 20 प्रतिशत से अधिक और वयस्कों में 40 प्रतिशत से अधिक जलना अत्यंत गंभीर स्थिति मानी जाती है। ऐसे मामलों में संक्रमण, अंगों की क्षति और जान का खतरा लगातार बना रहता है।

उन्होंने बताया कि संबंधित बाल मरीज कई दिनों तक अन्य अस्पतालों में उपचार कराने के बाद सेप्टीसीमिया जैसी गंभीर अवस्था में जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय लाया गया था। बच्चे के शरीर का बड़ा हिस्सा झुलस चुका था और मलद्वार व मूत्रमार्ग के आसपास का क्षेत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित था, जिससे संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका बनी हुई थी।

स्थिति अत्यंत नाजुक थी, लेकिन बर्न यूनिट की टीम ने हार नहीं मानी। डॉ. उदय धाबर्डे के नेतृत्व में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगातार निगरानी, समर्पण और आधुनिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से बच्चे को मौत के मुंह से बाहर निकालने की चुनौती स्वीकार की।

इलाज ही नहीं, संपूर्ण पुनर्वास पर दिया गया ध्यान

बर्न यूनिट की टीम ने केवल घावों के उपचार तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बच्चे के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया। लगातार ड्रेसिंग और असहनीय दर्द के बीच बच्चे को हाई प्रोटीन एवं हाई फाइबर डाइट दी गई ताकि शरीर तेजी से रिकवर कर सके।

इसके साथ ही नसों के माध्यम से पैरेंट्रल न्यूट्रिशन उपलब्ध कराया गया, जिससे शरीर को आवश्यक पोषण मिलता रहे। ड्रेसिंग के दौरान दर्द को कम करने के लिए विशेष एनाल्जेसिक इंजेक्शन दिए जाते थे, ताकि उपचार प्रक्रिया बच्चे के लिए कम तकलीफदेह बन सके।

बर्न यूनिट में बना बच्चों के लिए मानवीय और सकारात्मक माहौल

गंभीर परिस्थितियों में मानसिक मजबूती भी उपचार का अहम हिस्सा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए बर्न यूनिट में बच्चों के लिए एक विशेष मानवीय वातावरण तैयार किया गया। प्ले हाउस में खिलौने, छोटी कारें और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। टीवी पर कार्टून फिल्में दिखाकर बच्चों का ध्यान दर्द और तनाव से हटाने का प्रयास किया जाता था।

चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ भी केवल इलाज तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बच्चों से आत्मीय संवाद करते, उन्हें चॉकलेट देकर प्रोत्साहित करते और उपचार प्रक्रिया को सहज बनाने का प्रयास करते रहे। यही संवेदनशीलता बच्चे और उसके परिवार के लिए मानसिक संबल बन गई।

जब अस्पताल में मनाया गया मासूम का जन्मदिन

इलाज के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब बच्चे की हालत बेहद गंभीर हो गई। शरीर पूरी तरह सूज चुका था और सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। इसी बीच संयोगवश बच्चे का जन्मदिन आ गया।

ऐसे भावुक क्षण में बर्न यूनिट की पूरी टीम ने अस्पताल के भीतर ही बच्चे का जन्मदिन मनाने का निर्णय लिया। वार्ड को बैलून और सजावट से सजाया गया, केक लाया गया और सभी ने मिलकर बच्चे का जन्मदिन मनाया।

सुस्त और दर्द से जूझ रहा वह बच्चा जब मोमबत्ती बुझाकर केक काट रहा था, तब कुछ क्षणों के लिए उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई। यह दृश्य वहां मौजूद चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और बच्चे के माता-पिता सभी की आंखें नम कर गया।

माता-पिता ने कहा — “हम उम्मीद छोड़ चुके थे”

अस्पताल से छुट्टी के समय बच्चे के माता-पिता भावुक हो उठे। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा आ गया था जब उन्होंने अपने बच्चे के बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के बर्न यूनिट ने उनके बच्चे को नया जीवन दिया।

परिजनों ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां उन्हें केवल इलाज ही नहीं, बल्कि परिवार जैसा सहयोग और भरोसा मिला।

पूरी टीम की भूमिका रही महत्वपूर्ण

इस सफल उपचार में मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी का निरंतर मार्गदर्शन विभाग को मिलता रहा। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर ने कहा कि एडवांस बर्न केयर यूनिट अस्पताल का अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो गंभीर मरीजों के उपचार में पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य कर रहा है।

इस जटिल उपचार प्रक्रिया में अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिरुद्ध मेने, जूनियर ऑफिसर सुनीता साहु, वार्ड इंचार्ज शोभा सिस्टर, नर्सिंग स्टाफ, ड्रेसर, सेनेटरी वर्कर और अटेंडेंट्स की सामूहिक भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही।

मानवता, संवेदनशीलता और आधुनिक चिकित्सा का अद्भुत संगम

जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय का एडवांस बर्न केयर यूनिट आज यह साबित कर रहा है कि आधुनिक चिकित्सा केवल मशीनों और दवाइयों का नाम नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, विश्वास और समर्पण का भी दूसरा रूप है।

गंभीर रूप से झुलसे इस मासूम बच्चे की जिंदगी बचाना केवल एक सफल उपचार नहीं, बल्कि मानवता की उस भावना का उदाहरण है, जहां डॉक्टर केवल चिकित्सक नहीं बल्कि उम्मीद और जीवन के संरक्षक बन जाते हैं।