शांति सोनी को मिला प्रथम सम्मान, “युवा पत्रकारिता : दिशा, दृष्टि और दायित्व” विषय पर प्रभावशाली वक्तव्य ने जीता सभी का मन पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित भव्य समारोह में मेडल एवं सम्मान पत्र से हुई सम्मानित, मुख्य वक्ता के रूप में रखे विचार

 शब्द जब समाज की चेतना बनकर जनमानस को दिशा देने लगते हैं, तब पत्रकारिता केवल समाचारों का माध्यम नहीं रह जाती, बल्कि वह राष्ट्र और समाज के भविष्य का मार्गदर्शन करने वाली शक्ति बन जाती है। इसी विचारधारा को सार्थक करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शांति सोनी को “युवा पत्रकारिता : दिशा, दृष्टि और दायित्व” विषय पर लिखे गए उत्कृष्ट आलेख के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। यह सम्मान शब्द भूमि प्रकाशन द्वारा पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।











समारोह में शांति सोनी को मेडल एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करने का गौरवपूर्ण अवसर भी प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना के समन्वय की प्रेरणादायी अभिव्यक्ति बनकर सामने आई।

कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत गरिमामय एवं वैचारिक ऊर्जा से परिपूर्ण था। मंच पर देशभर से आए साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की। दीप प्रज्वलन के साथ जब पत्रकारिता की दो सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा का स्मरण किया गया, तब पूरा सभागार तालियों की गूंज से गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पत्रकारिता का इतिहास स्वयं वर्तमान के सामने खड़ा होकर अपने संघर्ष, सत्य और साहस की गाथा सुना रहा हो।

अपने पुरस्कृत आलेख “युवा पत्रकारिता : दिशा, दृष्टि और दायित्व” में शांति सोनी ने आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों, युवा पत्रकारों की भूमिका तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता की आवश्यकता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। आलेख का मुख्य संदेश था कि पत्रकारिता केवल शब्दों का व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और जनचेतना का महान संकल्प है। यदि युवा पत्रकार सत्य, संवेदना और निष्पक्षता को अपनी लेखनी का आधार बना लें, तो वे समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में शांति सोनी ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र की वह जाग्रत चेतना है, जो अन्याय और असत्य के अंधकार में सत्य का दीप प्रज्वलित करती है। उन्होंने कहा कि कलम में केवल शब्दों की शक्ति नहीं होती, बल्कि वह समाज को जागृत करने, सत्ता से प्रश्न पूछने और जनमानस को नई सोच देने का सामर्थ्य भी रखती है।

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में जहाँ सूचनाओं की गति अत्यंत तीव्र हो चुकी है, वहीं पत्रकारिता का दायित्व भी पहले से अधिक गंभीर हो गया है। आज युवा पत्रकारों को केवल समाचार प्रसारित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज के सजग मार्गदर्शक और नैतिक मूल्यों के संवाहक की भूमिका निभानी होगी। सत्यनिष्ठ और संवेदनशील पत्रकारिता ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

सम्मान ग्रहण करते समय शांति सोनी भावुक दिखाई दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए किसी साधना के फल के समान है। मेडल की चमक उनके लिए केवल धातु की चमक नहीं, बल्कि वर्षों के परिश्रम, समर्पण और साहित्यिक साधना की पहचान है। वहीं सम्मान पत्र उनके लिए प्रेरणा का वह दस्तावेज है, जो भविष्य में और अधिक गंभीर लेखन एवं सामाजिक चिंतन के लिए ऊर्जा प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल गौरव का विषय नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों का आह्वान भी है। पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने का यह ऐतिहासिक अवसर हमें याद दिलाता है कि कलम की शक्ति आज भी समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि पत्रकार अपनी लेखनी को सत्य, संवेदना, नैतिकता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित रखें।

समारोह के अंत में उपस्थित अतिथियों एवं साहित्यकारों ने शांति सोनी के विचारों और लेखन की सराहना करते हुए कहा कि उनके शब्दों में समाज को जागृत करने की शक्ति है। कार्यक्रम साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना के संगम का अविस्मरणीय उत्सव बनकर समाप्त हुआ।

“कलम जब सत्य के पक्ष में चलती है,

तो इतिहास बदलने का साहस रखती है।

पत्रकारिता केवल पेशा नहीं,

समाज के प्रति उत्तरदायित्व का पवित्र व्रत है।”