अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) के अवसर पर समाजसेवी एवं जागरूक विचारधारा की प्रतिनिधि क्रांतिकारी पार्वती साहू ने भारतीय श्रमिकों के अधिकारों के लिए किए गए बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि आज देश के मजदूरों को जो अधिकार, सुरक्षा और सम्मान मिला है, उसकी मजबूत नींव बाबा साहब ने ही रखी थी।
पार्वती साहू ने अपने संदेश में कहा कि एक समय था जब मजदूरों से 12 से 14 घंटे तक काम लिया जाता था और उनके अधिकारों की कोई सुनवाई नहीं होती थी। ऐसे कठिन दौर में बाबा साहब ने 1942 में वायसराय की काउंसिल में श्रम सदस्य रहते हुए 8 घंटे कार्य दिवस का नियम लागू करवाया, जो आज भी श्रमिकों के अधिकारों की आधारशिला है।
उन्होंने आगे बताया कि मजदूरों को शोषण से बचाने के लिए बाबा साहब ने न्यूनतम मजदूरी कानून की अवधारणा दी, जो आगे चलकर 1948 में कानून बना। इससे मजदूरों को उनके श्रम के अनुसार उचित पारिश्रमिक मिलने का रास्ता सुनिश्चित हुआ।
महिला मजदूरों के अधिकारों को लेकर भी बाबा साहब का योगदान अतुलनीय रहा है। पार्वती साहू ने बताया कि मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत गर्भवती महिलाओं को सवेतन अवकाश देने की व्यवस्था की गई, साथ ही समान काम, समान वेतन का सिद्धांत लागू कर महिला-पुरुष के बीच वेतन असमानता को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। इसके अलावा खदानों में महिलाओं के रात में काम करने पर रोक लगाकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने मजदूरों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की नींव रखी, जिससे आज करोड़ों श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा मिल रहा है। इसी तरह कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) के माध्यम से मजदूरों और उनके परिवारों को बीमारी और दुर्घटना की स्थिति में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई।
पार्वती साहू ने यह भी उल्लेख किया कि बाबा साहब ने ट्रेड यूनियनों को कानूनी मान्यता दिलाकर मजदूरों को संगठित होने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का अधिकार दिया। साथ ही रोजगार कार्यालय (Employment Exchange) की स्थापना कर बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की।
उन्होंने अपने संदेश में बाबा साहब के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि “मजदूरों की मुक्ति सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना संभव नहीं है।” उन्होंने युवाओं और श्रमिक वर्ग से अपील की कि वे “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” के मूलमंत्र को अपनाएं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
पार्वती साहू ने कहा कि आज जो सुविधाएं जैसे 8 घंटे की ड्यूटी, ओवरटाइम, पीएफ, ईएसआई, अवकाश और श्रमिक सुरक्षा कानून हमें प्राप्त हैं, वे बाबा साहब की दूरदर्शिता और संघर्ष का परिणाम हैं। मजदूर दिवस पर हमें उनके योगदान को याद करते हुए श्रमिकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने सभी श्रमिक भाइयों-बहनों को मजदूर दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में उनका योगदान अमूल्य है।
जय भीम | जय मजदूर | जय संविधान
