*वरिष्ठ कांग्रेस नेता लाल जी धीरज हुए भागवत कथा में शामिल, कृष्ण-रुक्मिणी विवाह झांकी ने मोह लिया मन*
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित छठ घाट, तोरवा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में आज का दिन विशेष भक्ति और उल्लास से भरा रहा। इस अवसर पर मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता लाल जी धीरज कार्यक्रम में शामिल हुए और कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
अरपा नदी के पावन तट पर आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने पूरे पंडाल को भक्तिमय बना दिया।
इस विशेष प्रस्तुति में TGB Media की डायरेक्टर पुष्पा साहू ने भगवान श्रीकृष्ण का रूप धारण किया, वहीं खुशी पाण्डेय ने रुक्मिणी के रूप में अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। दोनों की अदाकारी और सजीव अभिनय ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही विवाह की रस्में मंच पर निभाई गईं, पूरा वातावरण जयकारों और भक्ति भाव से गूंज उठा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी भक्तों ने कृष्ण-रुक्मिणी के इस पावन विवाह के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन को धन्य माना। आयोजन स्थल पर “जय श्रीकृष्ण” और “राधे-राधे” के जयकारों से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता लाल जी धीरज ने कहा कि, “अरपा नदी के किनारे इस तरह का भव्य भागवत कथा आयोजन होना हम सभी के लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। भागवत कथा हमें जीवन जीने की सही दिशा देती है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। ऐसे आयोजनों से हमारी संस्कृति और परंपराएं मजबूत होती हैं।”
कथा व्यास पं. मुरारी मोहन पाण्डेय जी ने अपने प्रवचन में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह का महत्व बताते हुए कहा कि यह प्रसंग प्रेम, श्रद्धा और अटूट विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भगवान और भक्त के बीच का संबंध इसी प्रकार की भक्ति और समर्पण से मजबूत होता है।
गौरतलब है कि यह श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव 5 अप्रैल से प्रारंभ होकर 12 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी इस आयोजन का हिस्सा हैं।
छठ घाट तोरवा में हो रहा यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी संदेश दे रहा है। कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की इस भव्य प्रस्तुति ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग दिया है।













