छत्तीसगढ़ की लोकधरोहर को संजोतीं – दीपशिखा श्रीवास

 रायपुर | भिलाई | जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़)

छत्तीसगढ़ की धरती लोक कलाकारों से समृद्ध रही है। यहां की मिट्टी में कला, संस्कृति और परंपरा की गहरी पहचान है। इन्हीं कलाकारों की श्रृंखला में एक सशक्त नाम है – दीपशिखा श्रीवास, जो अपने सिर पर कलश रखकर मनमोहक लोकनृत्य प्रस्तुत करती हैं और विलुप्तप्राय “कलश नृत्य” को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।











बचपन से शुरू हुई साधना

दीपशिखा श्रीवास, पिता श्री अमर श्रीवास, जन्मस्थान कैंप-10 नेहरू चौक, वार्ड-27, भिलाई की निवासी हैं। बचपन में खिलौनों को सिर पर संतुलित कर थिरकना उनका खेल था, लेकिन वही खेल आगे चलकर एक गंभीर साधना में बदल गया।

उन्होंने अपनी पहली प्रस्तुति स्कूल प्रांगण में दी और पहली मंचीय प्रस्तुति भाटापारा के लोककला महोत्सव में 3 कलश के साथ दी। मात्र 7–8 वर्ष की आयु से शुरू हुई यह सांस्कृतिक यात्रा आज भी निरंतर जारी है।

इस लोककला की प्रेरणा उन्हें अपने पिता श्री अमर श्रीवास से मिली, जो “लोक दर्शन” सांस्कृतिक संस्था के निर्माता-निर्देशक हैं और पिछले 43 वर्षों से लोककला के संरक्षण में जुटे हैं।

विलुप्त होती परंपरा को बचाने का संकल्प

कलश नृत्य अत्यंत कठिन विधा है। वर्तमान समय में इसे करने वाली दीपशिखा लगभग अकेली कलाकार हैं। पहले यह नृत्य संस्कृति विभाग के आयोजनों और लोककला महोत्सवों में प्रमुखता से देखा जाता था, किंतु अब यह प्रायः लुप्तप्राय हो चुका है।

दीपशिखा का कहना है कि यह केवल नृत्य नहीं, बल्कि एकाग्रता, संयम और दृढ़ता की साधना है।

शिक्षा और करियर

लोककला के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

12वीं तक की शिक्षा भिलाई से

बी.एससी. (गणित)

एम.सी.ए. (मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन)

उन्होंने हैदराबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक वर्ष तक कार्य भी किया, लेकिन अपनी संस्कृति के प्रति लगाव के कारण नौकरी छोड़कर पुनः छत्तीसगढ़ लौट आईं और स्वयं को लोकदर्शन संस्था को समर्पित कर दिया।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

दीपशिखा ने देश के कई प्रमुख मंचों पर प्रस्तुति दी है:

Narendra Modi के समक्ष आदि महोत्सव 2023 में प्रस्तुति

Droupadi Murmu के समक्ष आदि महोत्सव 2024 में प्रस्तुति

पूर्व मुख्यमंत्री Raman Singh द्वारा सराहना

वर्तमान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai द्वारा सम्मान

पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje के समक्ष प्रस्तुति

इसके अलावा प्रयागराज महाकुंभ, दिल्ली प्रगति मैदान, मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम नई दिल्ली सहित गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड, हैदराबाद, मुंबई, मध्यप्रदेश, उड़ीसा और राजस्थान जैसे राज्यों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं।

टीवी शो में चयन

जी टीवी के लोकप्रिय शो Satrangi Sasural के एक एपिसोड में उनकी कला पर केंद्रित विशेष शूट हुआ, जिसमें पद्मविभूषण पंडवानी गायिका Tejan Bai के साथ उनका प्रदर्शन प्रसारित हुआ।

नृत्य की विशेषता

दीपशिखा की प्रस्तुति की खासियत है —

एक साथ 9 कलश सिर पर संतुलित करना

नृत्य करते हुए जमीन से रूमाल उठाना

पीतल की थाली उठाना

तलवार की धार पर संतुलन बनाकर प्रस्तुति देना

उनकी प्रस्तुति दर्शकों को रोमांचित कर देती है और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मंच गूंज उठता है।

सम्मान और उपलब्धियां

उन्होंने राज्योत्सव रायपुर, राजिम कल्प मेला, दशहरा मेला बस्तर, चक्रधर महोत्सव, नारायणपुर मेला, जशपुर महोत्सव सहित अनेक मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति दी है।

उन्हें बेटी प्रतिभावान सम्मान, नारी शक्ति सम्मान, कला संवर्धन सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

दृढ़ निश्चय ही सफलता की कुंजी

कभी-कभी लोगों ने कहा कि “नृत्य में कुछ नहीं रखा”, लेकिन पिता के समर्थन और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से दीपशिखा आज राष्ट्रीय कलाकार के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि यदि मन में दृढ़ निश्चय हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं।

मीडिया परिवार की ओर से दीपशिखा श्रीवास के उज्ज्वल भविष्य की कामना।

राकेश कुमार साहू

जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़