*छठ घाट तोरवा बिलासपुर में भागवत कथा के दौरान दिखी अद्भुत कृष्णा लीला,*
*आज TGB Media की* *डायरेक्टर पुष्पा साहू कृष्णा के रूप में नजर आईं, वहीं खुशी पाण्डेय ने रुक्मिणी का रूप धारण किया।*
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित छठ घाट, तोरवा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू कार्यक्रम में शामिल हुए। अरपा नदी के पावन तट पर चल रहे इस भव्य आयोजन में उन्होंने श्रद्धा के साथ भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी जी का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कथा व्यास पं. मुरारी मोहन पाण्डेय जी से भी मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने आयोजकों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कहा कि, “अरपा नदी के किनारे 5 अप्रैल से प्रारंभ हुई यह श्रीमद् भागवत कथा हम सभी के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है। इस पावन कथा को सुनकर हम अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत एक ऐसी पुण्य भूमि है, जहाँ समय-समय पर भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण जैसे दिव्य अवतार हुए हैं और आज भी साधु-संतों की परंपरा इस धरती को पवित्र बनाए हुए है। ऐसे में बिलासपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान वाली धरती ‘बिलासा नगरी’ में this तरह का आयोजन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने कहा, “भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाती है। कथा के माध्यम से हमें भक्ति, ज्ञान और संस्कार का मार्ग मिलता है। यहां आकर कथा श्रवण करना और संतों का सानिध्य प्राप्त करना अपने आप में अत्यंत पुण्यदायी है। आज मैं स्वयं को यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं।”
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का रसपान कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। आयोजन स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया है और प्रतिदिन कथा के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि यह श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव 5 अप्रैल से प्रारंभ होकर 12 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया जा रहा है। साथ ही प्रतियोगिताएं और विशेष अनुष्ठान भी इस आयोजन का हिस्सा हैं।
बिलासपुर के छठ घाट तोरवा में हो रहा यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक जागरूकता का भी संदेश दे रहा है।








