राकेश साहू न्यूज एजेंसी जांजगीर-चांपा जांजगीर-चांपा में 18 करोड़ से अधिक का धान घोटाला उजागर अमरताल संग्रहण केंद्र से 48 हजार क्विंटल से ज्यादा धान गायब विधानसभा में उठा मामला, प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल
जांजगीर-चांपा।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में धान खरीदी व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जिले के अमरताल धान संग्रहण केंद्र क्रमांक 1/2 से भारी मात्रा में धान गायब होने का मामला उजागर हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केंद्र के रिकॉर्ड में 48,895.09 क्विंटल धान का अंतर पाया गया है, जिसे अब करोड़ों रुपये के घोटाले के रूप में देखा जा रहा है।
विधानसभा में उठा मामला
इस गंभीर मामले को अकलतरा विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने विधानसभा में उठाया। उनके प्रश्न के जवाब में प्रदेश के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने लिखित उत्तर में अमरताल संग्रहण केंद्र में धान के बड़े अंतर की पुष्टि की है।
विधानसभा में मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में हलचल मच गई है और धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आंकड़ों में सामने आया 18 करोड़ 58 लाख का घोटाला
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अमरताल संग्रहण केंद्र से 48,895.09 क्विंटल धान गायब पाया गया है। धान की कीमत और परिवहन खर्च को जोड़कर इसकी कुल राशि का अनुमान लगाया गया है—
धान की कीमत : 3100 रुपये प्रति क्विंटल
परिवहन लागत : 700 रुपये प्रति क्विंटल
कुल मूल्य : 3800 रुपये प्रति क्विंटल
इस आधार पर गणना की जाए तो
48,895.09 × 3800 = 18,58,01,342 रुपये
अर्थात लगभग 18 करोड़ 58 लाख 1 हजार 342 रुपये का घोटाला सामने आ रहा है।
शिकायतों के दौरान फोन नहीं उठाते थे अधिकारी
इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि धान खरीदी के दौरान जब केंद्रों में गड़बड़ी और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आ रही थीं, तब जिले के जिला खाद्य अधिकारी कौशल साहू से पत्रकार, जनप्रतिनिधि और किसान लगातार संपर्क करने की कोशिश करते थे, लेकिन उनका फोन अक्सर नहीं उठता था।
इसी तरह धान खरीदी केंद्रों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी अमित साहू पर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसानों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। यदि समय रहते कार्रवाई होती तो संभवतः इतनी बड़ी गड़बड़ी नहीं होती।
भ्रष्टाचार को हल्के में लेने के आरोप
किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि धान खरीदी के दौरान स्टॉक, परिवहन और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार की जाती थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इन्हें हल्के में लेते रहे।
अब जब विधानसभा में मामला उजागर हुआ है और करोड़ों रुपये की गड़बड़ी सामने आ रही है, तो प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने की आशंका
जिले में यह चर्चा भी तेज है कि मामले को शांत करने के लिए छोटे कर्मचारियों या केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा सकती है। जबकि धान खरीदी, भंडारण और परिवहन की पूरी प्रक्रिया कई स्तरों की निगरानी में होती है।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद किसानों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
यदि जांच में यह घोटाला पूरी तरह प्रमाणित होता है, तो यह छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था से जुड़े सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जाएगा।
