विश्व धरोहर दिवस पर शांति सोनी के नेतृत्व में रतनपुर में सांस्कृतिक एवं जल संरक्षण जागरूकता अभियान जीवनधारा नमामि गंगे बिलासपुर इकाई द्वारा धरोहर संरक्षण एवं जल संवर्धन का प्रेरणादायी संदेश
विश्व धरोहर दिवस के पावन अवसर पर जीवनधारा नमामि गंगे संस्थान, बिलासपुर इकाई के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी रतनपुर में एक भव्य सांस्कृतिक एवं जनजागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर समाजसेवी एवं संस्थान की सक्रिय सदस्य शांति सोनी के नेतृत्व में आयोजित यह अभियान केवल धरोहर स्थलों के अवलोकन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं सामाजिक जागरूकता का प्रेरणादायी संगम बनकर उभरा।
रतनपुर, जिसे माँ महामाया की नगरी के रूप में जाना जाता है, अपने प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक सरोवरों, स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व के कारण छत्तीसगढ़ की अनुपम धरोहर मानी जाती है। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर संस्थान के सदस्यों ने नगर के विभिन्न ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर वहाँ की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। कार्यक्रम के दौरान लोगों को यह समझाया गया कि हमारी धरोहरें केवल ईंट-पत्थरों से बनी संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और इतिहास की जीवंत पहचान हैं।
संस्थान के अध्यक्ष डॉ. हरिओम शर्मा के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार सभी सदस्यों ने माँ महामाया देवी मंदिर परिसर स्थित पावन सरोवर के तट पर सामूहिक रूप से विधिवत पूजा-अर्चना की। आध्यात्मिक वातावरण में उपस्थित सभी लोगों ने जल को जीवन का आधार मानते हुए जल संरक्षण एवं जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम के दौरान “जल है तो कल है” एवं “हर बूंद अनमोल है” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जल के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
इस अवसर पर शांति सोनी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि हमारी सांस्कृतिक धरोहरें हमारी सभ्यता की आत्मा हैं। प्राचीन मंदिर, सरोवर, तालाब एवं जल स्रोत भारतीय संस्कृति में केवल धार्मिक स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के संतुलन के प्रतीक के रूप में पूजे जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम आज अपनी धरोहरों और जल स्रोतों की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी संस्कृति और प्रकृति दोनों से दूर हो जाएँगी। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। शांति सोनी द्वारा प्रस्तुत “गंगा तेरा पानी अमृत” एवं “मानो तो मैं गंगा माँ हूँ” जैसे भावपूर्ण गीतों ने वातावरण को भक्ति एवं राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत कर दिया। वहीं डॉ. रश्मि सिंह एवं गौरी कश्यप द्वारा बनाई गई आकर्षक एवं संदेशपरक रंगोली ने कार्यक्रम की शोभा को और भी बढ़ा दिया। रंगोली के माध्यम से जल संरक्षण, स्वच्छता एवं सांस्कृतिक विरासत बचाने का संदेश अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
शांति सोनी द्वारा विश्व धरोहर दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए रतनपुर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि रतनपुर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का गौरवशाली प्रतीक है। यहाँ स्थित प्राचीन मंदिर, सरोवर और ऐतिहासिक धरोहरें हमारी समृद्ध परंपरा एवं गौरवशाली इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान धरोहर संरक्षण एवं “जल बचाओ” अभियान के अंतर्गत लोगों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त वातावरण एवं जल स्रोतों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। उपस्थित सदस्यों एवं स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक इस अभियान में भाग लेते हुए समाज को सकारात्मक दिशा देने का संकल्प लिया। वातावरण देशभक्ति, आध्यात्मिकता, संस्कृति प्रेम एवं प्रकृति संरक्षण की भावना से पूर्णतः सराबोर दिखाई दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने एक स्वर में यह संकल्प दोहराया—
“जल है तो कल है,
धरोहर है तो संस्कृति अमर है।”
विश्व धरोहर दिवस पर आयोजित यह विशेष अभियान संस्कृति संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता, जल संवर्धन एवं सामाजिक सहभागिता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया। इस आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि यदि हम अपनी सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, समृद्ध एवं संस्कारित भविष्य का निर्माण संभव हो सकेगा।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में डॉ. शीला शर्मा, आदरणीय उमेश रस्तोगी सर, रिजवाना परवीन मैडम, गौरी कश्यप मैडम, ज्योत्सना मिश्रा मैडम, पेंड्रा से आदरणीय कृष्ण कुमार शर्मा सर एवं भुवनेश्वर कुमार यादव सर, नीरजा सक्सेना मैडम, डॉ. रश्मि सिंह मैडम सहित जीवनधारा नमामि गंगे संस्थान से जुड़े अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी सदस्यों की सक्रिय सहभागिता एवं प्रेरणादायी उपस्थिति ने कार्यक्रम को अत्यंत भव्य, सफल एवं गरिमामयी बना दिया।