राष्ट्रीय संगोष्ठी में शांति सोनी जी सम्मानित “भारतीय ज्ञान परंपरा की कसौटी पर विकलांग विमर्श का पुनर्मूल्यांकन” विषय पर उत्कृष्ट शोध आलेख चयनित
शासकीय महाविद्यालय दीपिका में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय एकदिवसीय संगोष्ठी में “भारतीय ज्ञान परंपरा की कसौटी पर विकलांग विमर्श का पुनर्मूल्यांकन” विषय पर देशभर के विद्वानों, शोधार्थियों एवं साहित्यकारों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। ज्ञान, संवेदना और भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि से ओतप्रोत इस संगोष्ठी में शांति सोनी का शोध आलेख विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
भारतीय ज्ञान परंपरा में समावेशिता, करुणा और मानवीय संवेदना के मूल्यों को अत्यंत साहित्यिक एवं प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करते हुए शांति सोनी ने विकलांग विमर्श के विविध आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके आलेख में भारतीय संस्कृति की उस दिव्य दृष्टि का उल्लेख था, जहाँ मनुष्य को उसकी शारीरिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, चेतना और आत्मबल से पहचाना जाता है। उनके शोधपत्र ने उपस्थित विद्वानों को गहराई से प्रभावित किया।
संगोष्ठी में प्रस्तुत अनेक शोध आलेखों के मध्य शांति सोनी के आलेख को “बेस्ट आर्टिकल” के रूप में चयनित किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करते समय सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा और वातावरण गौरव एवं प्रेरणा से भर गया।
अपने उद्बोधन में शांति सोनी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा सदैव मानवता, समानता और सहअस्तित्व की पक्षधर रही है। समाज को आवश्यकता है कि वह संवेदनाओं के दीप जलाकर प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और अवसर प्रदान करे।
यह उपलब्धि न केवल उनके साहित्यिक एवं शोध कौशल का प्रमाण है, बल्कि समाज में सकारात्मक चिंतन और समावेशी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने वाला प्रेरणादायी संदेश भी है।





