सांसद विजय बघेल ने 3 घंटे बैठकर देखी “रमाई”, प्रेरणा धाबर्डे और उदय धाबर्डे की दमदार प्रस्तुति ने किया भावुक

 भिलाई।

छत्तीसगढ़ में निर्मित बहुचर्चित बॉलीवुड हिन्दी ऐतिहासिक फिल्म “रमाई” का विशेष प्रदर्शन आज प्रातः 9 बजे चंद्रा मोर्या टॉकीज़ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद Vijay Baghel अपने सहयोगियों के साथ उपस्थित रहे और उन्होंने पूरे 3 घंटे तक फिल्म को कलाकारों के साथ बैठकर देखा।
















कार्यक्रम में फिल्म के मुख्य कलाकार प्रेरणा धाबर्डे, उदय धाबर्डे, ओमकार दास मानिकपुरी (नत्था) और रज़ा मुराद की भूमिकाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। फिल्म का निर्माण कृष्णा चौहान द्वारा किया गया है, जबकि निर्देशन और लेखन का दायित्व कबीर दा ने निभाया है। संगीत दिनेश अर्जुन द्वारा तैयार किया गया है।

सांसद विजय बघेल ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि “रमाई” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन के उस अनदेखे और अनछुए पहलू को उजागर करती है, जो उनकी धर्मपत्नी रमाबाई अम्बेडकर (रमाई) के त्याग, संघर्ष और समर्पण से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि किसी भी महान व्यक्ति की सफलता के पीछे उसके जीवनसाथी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, और इस फिल्म में इस सत्य को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में दर्शाया गया है कि किस प्रकार रमाई जी ने विपरीत परिस्थितियों में लकड़ी और गोबर के उपले बेचकर अपने पति की विदेश में शिक्षा के लिए धन जुटाया। इन दृश्यों को देखकर सांसद स्वयं भी कई क्षणों में भावुक हो उठे।

फिल्म में डॉ. अम्बेडकर के बैरिस्टर बनकर विदेश से लौटने के बाद समाज सुधार के लिए किए गए उनके संघर्ष, बहिष्कृत समाज के अधिकारों के लिए आंदोलन तथा समानता और न्याय की लड़ाई को भी प्रभावी रूप से दर्शाया गया है। साथ ही 8 घंटे कार्य दिवस, महिला-पुरुष समान वेतन, जल अधिकार और स्वतंत्र मतदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।

सांसद बघेल ने कहा कि यह फिल्म समाज में व्याप्त भेदभाव और कुरीतियों के खिलाफ एक सशक्त संदेश देती है और हर वर्ग के लोगों को इसे अवश्य देखना चाहिए। उन्होंने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और निर्माण टीम को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम के अंत में सांसद विजय बघेल ने इस महिला प्रधान, ऐतिहासिक और प्रेरणादायक फिल्म को छत्तीसगढ़ के मंत्रिमंडल के साथ देखने की इच्छा व्यक्त की। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ में बनी और छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा अभिनीत इस पहली हिन्दी फिल्म को टैक्स फ्री करने की सिफारिश भी की।

यह आयोजन न केवल एक फिल्म प्रदर्शन था, बल्कि समाज को जागरूक करने और प्रेरित करने का एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ।