मातृभाषा हमारी भावनाओं की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति का माध्यम – राज्यपाल रमेन डेका राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास
रायपुर, 11 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में संत शदाराम साहिब भाषा भवन का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर के तहत आयोजित आइडियाथॉन कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि अपनी भावनाओं, दुख और खुशी को व्यक्त करने का सबसे सरल और सशक्त माध्यम हमारी मातृभाषा होती है। मातृभाषा से हमारा आत्मीय जुड़ाव होता है और यह हमारी संस्कृति तथा पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि किसी अनजान स्थान पर भी जब हम अपनी मातृभाषा बोलने वाले व्यक्ति से मिलते हैं, तो तुरंत एक आत्मीयता और अपनत्व का भाव उत्पन्न हो जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध संस्कृति और विविध भाषाओं के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। हमारा देश बहुभाषी होते हुए भी एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। इसमें संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे हमारी प्राचीनतम भाषा माना जाता है। यदि गहराई से अध्ययन किया जाए तो संस्कृत के अनेक शब्द आज भी भारतीय भाषाओं जैसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, असमिया आदि में प्रचलित हैं।
राज्यपाल ने कहा कि संत शदाराम साहिब भाषा भवन का निर्माण सिंधी भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में सिंधी भाषा में एक वर्षीय डिप्लोमा तथा स्नातकोत्तर (एम.ए.) पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जो भाषा को जीवित रखने के लिए सराहनीय प्रयास है।
उन्होंने कहा कि भारत में अनेक भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं, जिनमें सिंधी भाषा भी एक महत्वपूर्ण भाषा है। इसमें साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा निरंतर प्रवाहित हो रही है। विभाजन के बाद सिंधी समाज के लोग भारत के विभिन्न हिस्सों में बस गए और अपनी मेहनत व परिश्रम से उन्होंने समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज देश का शायद ही कोई ऐसा राज्य होगा जहां सिंधी समाज के लोग निवास नहीं करते हों। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में सिंधी समाज के लोग रहते हैं।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देना अच्छी बात है, लेकिन जिस प्रदेश में हम रहते हैं, वहां की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। इससे समाज में सौहार्द और समरसता की भावना मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। ये भाषाएं हमारी सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी का कर्तव्य है। साथ ही भारतीय भाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक इन भाषाओं में निहित ज्ञान-विज्ञान, इतिहास, साहित्य और संस्कृति को सहज रूप से पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पिछले वर्ष आयोजित आइडियाथॉन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए।
इस अवसर पर शदाणी दरबार के पीठाधीश्वर संत श्री युधिष्ठीर लाल जी महाराज, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद नई दिल्ली से प्रोफेसर सुनील बाबूराव कुलकर्णी, रायपुर शहर के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला तथा कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएं और सिंधी समाज के अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।



