बिलासपुर की पोर्टर खोली में प्रकट हुए दक्षिणमुखी हनुमान जी, भक्त संजय साहू की आस्था से बना भव्य मंदिर

 बिलासपुर। आस्था और विश्वास की शक्ति क्या होती है, इसका जीवंत उदाहरण बिलासपुर की पोर्टर खोली में स्थित दक्षिणमुखी श्री हनुमान मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना की कहानी स्वयं में प्रेरणादायक है, जो संघर्ष, भक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।











1994 में शुरू हुई आस्था की कहानी

वर्ष 1994 की बात है। उस समय संजय साहू अपने विद्यालय की पढ़ाई पूर्ण कर बेरोजगारी के दौर से गुजर रहे थे। बड़ा परिवार और एकमात्र कमाने वाला सदस्य होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण थी। रोज कमाओ-रोज खाओ की स्थिति में रेलवे की जमीन पर झोपड़ी बनाकर पोर्टर खोली में निवास करते थे।

एक दिन बाईपास लाइन किनारे गड्ढे में पानी में उतरते समय उनके पैर से एक पत्थर टकराया। पहले उन्होंने उसे सामान्य पत्थर समझकर पानी में छोड़ दिया, लेकिन दोबारा वही पत्थर उनके पैर से टकराया। जब उसे ध्यान से देखा तो उसमें श्री हनुमान जी की आकृति स्पष्ट दिखाई दी। पत्थर को घर लाकर साफ किया गया और माता के निर्देशानुसार घर के पास नीम के पेड़ के नीचे स्थापित कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की गई।

प्रतिज्ञा और चमत्कारी परिवर्तन

हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर संजय साहू ने प्रभु से प्रार्थना की कि यदि उन्हें रोजगार का अवसर मिले तो वे एक छोटा मंदिर अवश्य बनवाएंगे। उनकी आस्था रंग लाई। अगले ही वर्ष उन्हें सेना में भर्ती हेतु बुलावा पत्र प्राप्त हुआ। साथ ही स्काउट-गाइड कोटे से रेलवे में नौकरी का अवसर भी मिला।

गौरतलब है कि संजय साहू बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे। वर्ष 1983 से स्काउट-गाइड से जुड़े और 1987 में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अंततः उन्होंने रेलवे की सेवा स्वीकार की।

वेतन का आधा हिस्सा मंदिर निर्माण में लगाया

रेलवे में नौकरी ज्वाइन करने के बाद संजय साहू ने अपने वेतन का आधा हिस्सा परिवार के भरण-पोषण में और आधा हिस्सा मंदिर निर्माण हेतु समर्पित करना शुरू किया। निरंतर प्रयासों के बाद उसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया और विधि-विधान से श्री हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।

स्थापना के दिन आए पंडितों ने बताया कि यह दक्षिणमुखी श्री हनुमान जी अत्यंत सिद्ध और प्रभावशाली स्वरूप हैं। श्रद्धा और भक्ति से सेवा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।

आज भी जारी है सेवा और आस्था

आज यह मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना पंडितों द्वारा कराई जाती है। संजय साहू के साथ उनके भाई और मित्र, जो उस समय पोर्टर खोली में रहते थे, सभी ने मिलकर भगवान की सेवा की। आज उनमें से कई लोग रेलवे सेवा में कार्यरत हैं।

भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

अंत में संजय साहू सभी श्रद्धालुओं से निवेदन करते हैं कि वे इस पावन स्थल पर आकर श्री हनुमान जी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करें।

बोलिए बजरंगबली की जय!