धान का कटोरा बनाम अफीम का कटोरा : छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर

 राकेश न्यूज़ एजेंसी, जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़)

जांजगीर-चांपा।

एक समय था जब छत्तीसगढ़ राज्य को पूरे देश में “धान का कटोरा” कहा जाता था। इसका मुख्य कारण यहां की उपजाऊ भूमि और बड़े पैमाने पर होने वाली धान की खेती थी। छत्तीसगढ़ में धान का उत्पादन देश के कई राज्यों की तुलना में अधिक होता है और यहां का चावल देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक भेजा जाता है। इसी वजह से छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से धान के कटोरे के रूप में बनी हुई है।








लेकिन वर्तमान समय में कुछ ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिन्होंने इस पहचान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में अवैध अफीम की खेती के मामले उजागर हुए हैं। दुर्ग जिले में एक जनप्रतिनिधि के खेत में अफीम की खेती मिलने की खबर सामने आई, वहीं दूसरी ओर बलरामपुर जिले में भी अफीम की खेती का मामला उजागर होने से प्रशासन और सरकार पर कई सवाल उठने लगे हैं।

इन घटनाओं के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य में कानून व्यवस्था और शासन व्यवस्था कमजोर हो रही है, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो छत्तीसगढ़ की पहचान को नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तारी की बात कही जा रही है। लेकिन आम जनता में यह चर्चा भी है कि क्या इन मामलों में निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई होगी या फिर मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

छत्तीसगढ़ की पहचान हमेशा से कृषि प्रधान राज्य की रही है, जहां किसानों की मेहनत से धान की भरपूर पैदावार होती है। ऐसे में अवैध नशे की खेती और उससे जुड़े मामलों का सामने आना राज्य की छवि को प्रभावित कर सकता है।

अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि छत्तीसगढ़ की पहचान धान के कटोरे के रूप में बनी रहे, इसके लिए शासन-प्रशासन को अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगानी होगी और किसानों को खेती के सही मार्ग पर प्रोत्साहित करना होगा।

रिपोर्ट: राकेश न्यूज़ एजेंसी

जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़