छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री लगातार आगे बढ़ रही है। नई-नई फिल्में बन रही हैं, कलाकार पहचान बना रहे हैं, निर्माता-निर्देशक बड़े बजट के साथ काम कर रहे हैं। लेकिन एक बड़ा सवाल आज भी खड़ा है — क्या इस इंडस्ट्री में फिल्म प्रमोटरों और पत्रकारों को उनका उचित सम्मान मिल रहा है?
फिल्म के निर्माण में जितनी मेहनत निर्माता, निर्देशक, अभिनेता-अभिनेत्री और तकनीकी टीम करती है, उतनी ही मेहनत प्रमोटर भी करते हैं।
दिन-रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य माध्यमों से फिल्म की हर छोटी-बड़ी अपडेट जनता तक पहुंचाई जाती है। पोस्टर रिलीज, ट्रेलर लॉन्च, गानों की जानकारी, शूटिंग अपडेट — हर स्तर पर प्रमोटर सक्रिय रहते हैं।
फिर भी हकीकत यह है कि:
प्रीमियर शो में प्रमोटरों को आमंत्रित नहीं किया जाता।
कार्यक्रमों में गेट पर पहचान बतानी पड़ती है कि वे प्रमोटर हैं।
मुहूर्त, पोस्टर लॉन्च और सम्मान समारोह में उन्हें मंच पर स्थान नहीं दिया जाता।
पुष्पगुच्छ, शॉल-श्रीफल या प्रतीक चिन्ह से सम्मान तो दूर, उनका नाम तक नहीं लिया जाता।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, क्योंकि जमीनी स्तर पर फिल्म का सबसे अधिक प्रचार-प्रसार प्रमोटर ही करते हैं।
इसी प्रकार पत्रकारों की स्थिति भी अलग नहीं है।
पत्रकार फिल्मी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करते हैं, इंटरव्यू करते हैं, प्रेस नोट चलाते हैं, कार्यक्रम कवर करते हैं। लेकिन जब विज्ञापन की बात आती है, तो अक्सर यह कहकर मना कर दिया जाता है कि “फंड नहीं है।”
जब लाखों-करोड़ों रुपये फिल्म निर्माण में खर्च किए जाते हैं, तब 5,000 या 10,000 रुपये का विज्ञापन देने में संकोच क्यों?
क्या मीडिया और प्रमोशन के बिना फिल्म दर्शकों तक पहुंच सकती है?
यह समय है कि:
छत्तीसगढ़ी फिल्म एसोसिएशन
छत्तीसगढ़ी फिल्म विकास निगम
इन दोनों संस्थाओं को प्रमोटरों और पत्रकारों के सम्मान और अधिकारों के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
फिल्म प्रमोटरों को आधिकारिक पहचान-पत्र दिया जाए।
प्रीमियर और बड़े कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित किया जाए।
सम्मान समारोह में उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाए।
पत्रकारों के लिए विज्ञापन और मीडिया सहयोग की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।
फिल्म सिर्फ पर्दे पर नहीं बनती — वह प्रचार से जन-जन तक पहुंचती है।
और प्रचार की रीढ़ हैं प्रमोटर और पत्रकार।
आज आवश्यकता है कि इंडस्ट्री अपने उन स्तंभों को पहचाने, जो परदे के पीछे रहकर उसकी नींव मजबूत करते हैं।
रिपोर्टर:
राकेश कुमार साहू
जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़
