सत्ता से साज़िश तक? बेलतरा में उठे गंभीर सवाल

 बेलतरा विधानसभा क्षेत्र, Bilaspur की जनता ने विकास और सुशासन के नाम पर जनादेश दिया था। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्र की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जब जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी ही आपराधिक आरोपों में घिरने लगें, तो सवाल केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी राजनीतिक संस्कृति और जवाबदेही पर उठते हैं।
















मामला तब और संवेदनशील हो गया जब भारतीय जनता पार्टी के बेलतरा पूर्वी मंडल अध्यक्ष राजू सोनकर का नाम एक गंभीर आपराधिक प्रकरण में सामने आया। राजू सोनकर को बेलतरा विधायक Sushant Shukla का करीबी माना जाता है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है।

सुपारी किलिंग की साजिश का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकिशोर नगर वसंत विहार स्थित एक ज्वेलर्स संचालक पर हुए प्राणघातक हमले और लूटकांड की जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Rajnesh Singh ने बिलासा गुड़ी में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि जांच के दौरान एक गिरोह का खुलासा हुआ है, जो केवल लूट और चोरी ही नहीं, बल्कि शहर के चर्चित सब्जी कारोबारी एवं नगर निगम के भाजपा पार्षद बंधु मौर्य की कथित सुपारी किलिंग की साजिश में भी शामिल था।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने 25 लाख रुपये में सुपारी लेने की बात स्वीकार की है, जिसमें 6 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

“अपराध पर चुप्पी क्यों?” — विपक्ष का सवाल

कांग्रेस नेता Ankit Gauraha ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अपराध पर चुप्पी क्यों? नेतृत्व जवाब क्यों नहीं देता?” उन्होंने आरोप लगाया कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में हालात गंभीर हैं और इस घटना से क्षेत्र की छवि धूमिल हुई है।

उनके अनुसार जिले में दहशत का माहौल है, व्यापारी वर्ग असुरक्षित महसूस कर रहा है और आम जनता असमंजस की स्थिति में है। यदि सत्ताधारी दल के पदाधिकारी पर ही हत्या की सुपारी जैसी साजिश का आरोप लगे, तो यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का प्रश्न भी बन जाता है।

जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो संबंधित जनप्रतिनिधि और पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट बयान क्यों नहीं आया? मंडल अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया, उनकी पृष्ठभूमि और संभावित संरक्षण जैसे मुद्दे अब जांच और सार्वजनिक विमर्श का विषय बन चुके हैं।

जब अपराध का तार सत्ता से जुड़े नामों तक पहुंचे, तो पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। जनता अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई चाहती है।

बेलतरा की जनता ने विकास के नाम पर भरोसा जताया था। अब यह देखना होगा कि नेतृत्व इस विश्वास को कायम रख पाता है या नहीं।