न इलाज , न जवाब : गरीबों के हक़ पर सौदेबाज़ी ? अपोलो हॉस्पिटल मौन, बेलतरा विधायक का दावा ज़मीनी हकीकत से दूर ,,,
बिलासपुर/बेलतरा। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावे अब ज़मीनी सच्चाई से कोसों दूर नज़र आ रहे हैं। बेलतरा विधायक द्वारा सार्वजनिक मंच से यह कहा गया था कि “या तो अपोलो हॉस्पिटल आयुष्मान कार्ड के तहत गरीबों का इलाज शुरू करे, या शासकीय ज़मीन खाली करे”, लेकिन यह बयान अब सिर्फ़ शब्दों तक सीमित होकर रह गया है।
हकीकत यह है कि अपोलो हॉस्पिटल में आज तक आयुष्मान कार्ड से गरीबों का इलाज शुरू नहीं हुआ। जिला बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक पत्र इस बात की पुष्टि करता है कि अपोलो हॉस्पिटल ने आयुष्मान भारत एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना में पंजीकरण के लिए आवश्यक आवेदन तक नहीं किया। जबकि अस्पताल को इस संबंध में कई बार निर्देशित और अवगत कराया जा चुका था।
इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और राजनीतिक दावों—दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विधायक का ‘अल्टीमेटम’ सिर्फ़ दिखावा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक का यह अल्टीमेटम महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी और प्रचार बनकर रह गया। न तो अपोलो हॉस्पिटल में गरीबों का इलाज शुरू हुआ, और न ही शासकीय ज़मीन को लेकर कोई सख़्त कदम उठाया गया।
आज भी हालात यह हैं कि गरीब मरीज आयुष्मान कार्ड हाथ में लेकर अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि विधायक के दावे ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
गरीबों की भावनाओं से किया गया खिलवाड़
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “जब अपोलो हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड से इलाज शुरू ही नहीं हुआ, तो विधायक का तथाकथित ‘अल्टीमेटम’ आखिर किसके लिए था? यह गरीबों की उम्मीदों और भावनाओं के साथ सीधा खिलवाड़ है।”
उन्होंने आगे बताया कि इस विषय को लेकर शीघ्र ही कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा और संबंधित विभागीय मंत्री से भी मुलाकात की जाएगी। उनका स्पष्ट कहना है कि गरीबों को न्याय दिलाना और अपोलो हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज सुनिश्चित कराना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

