बेलतरा की गूंज: जमीन तक सीमित सवाल या जनसमस्याओं की व्यापक आवाज?
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति इन दिनों फिर सुर्खियों में है। सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा सत्र में उठाए गए सवालों ने नई बहस को जन्म दिया है। सवाल यह है कि क्या ये मुद्दे वास्तव में क्षेत्र की प्राथमिक समस्याओं को प्रतिबिंबित करते हैं, या फिर चर्चा केवल जमीन, टावर और अतिक्रमण तक सीमित होकर रह गई है?
पूर्व जिला पंचायत सभापति एवं कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने तंज कसते हुए कहा कि विधायक “जमीन से जुड़े” तो अवश्य हैं, लेकिन उनके सवाल भी अधिकतर जमीन और टावरों के इर्द-गिर्द ही घूमते नजर आते हैं। कभी बिलासपुर को “उड़ता पंजाब” कहे जाने का बयान हो, तो कभी चौड़ीकरण के नाम पर लिंगियाडीह खाली करवाने का संकल्प—इन बयानों ने क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
अंकित गौरहा का आरोप है कि विधानसभा में शासकीय जमीनों को खाली कराने, बिल्डरों की जांच और टावरों से जुड़े प्रश्नों पर जोर तो दिखता है, लेकिन बेलतरा के शहरी और ग्रामीण इलाकों की मूलभूत समस्याएं—सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर और कानून-व्यवस्था—पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिख रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में बेलतरा क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक और राजनीतिक घटनाओं ने सरकार की छवि पर भी प्रभाव डाला है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि उनका जनप्रतिनिधि क्षेत्र के समग्र विकास, सामाजिक संतुलन और जनहित के व्यापक मुद्दों को कितनी प्राथमिकता दे रहा है।
अब सबकी निगाहें आगामी विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। क्या बेलतरा की वास्तविक समस्याएं सदन में मजबूती से गूंजेंगी, या बहस जमीन और टावरों के दायरे में ही सिमटकर रह जाएगी?
बेलतरा की जनता जवाब चाहती है—और आने वाला सत्र तय करेगा कि उनकी आवाज कितनी बुलंद होगी।





