स्वर्णभूमि में श्रीमद्भागवत कथा: आचार्य रमाकांत शर्मा ने सुनाए भक्तिमय प्रसंग, श्रद्धालु हुए भावविभोर
राजधानी स्वर्णभूमि में स्वर्णभूमि परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग कथा श्रवण कर धर्म लाभ ले रहे हैं।
मथुरा से पधारे परम पूज्य गुरुदेव श्री विष्णु प्रसाद दीक्षित जी के कृपापात्र शिष्य आचार्य श्री रमाकांत शर्मा जी महाराज अपनी मधुर एवं ओजस्वी वाणी से कथा का रसपान करा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि ईश्वर की सच्चे मन से की गई भक्ति हर जीव के जीवन को सफल बना देती है।
कथा के दौरान महाराज श्री ने ध्रुव जी के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि दृढ़ संकल्प और निष्कपट भक्ति से बालक ध्रुव को स्वयं भगवान के दर्शन प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, भगवान का स्मरण उसे उच्चतम लक्ष्य तक पहुंचा सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने पृथु, पुरंजन और जड़भरत के प्रसंगों के माध्यम से मानव जीवन की वास्तविकता को समझाया तथा अजामिल चरित्र सुनाकर भगवन्नाम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अंत समय में भी भगवान का नाम लेने से जीव का कल्याण संभव है।
भक्त प्रह्लाद चरित्र के वर्णन के समय पूरा पांडाल भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ आनंद व्यक्त किया। कथा के पश्चात श्रद्धालुओं ने श्री बांके बिहारी जी के दर्शन कर भजन-कीर्तन में भाग लिया और भावविभोर हो उठे।
आयोजक स्वर्णभूमि परिवार ने बताया कि कथा का उद्देश्य समाज में धार्मिक संस्कार और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना है। कथा में प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या आयोजन की सफलता को दर्शा रही है। श्रद्धालुओं ने आयोजन के लिए आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।



